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फ़ायरबॉल: विज़िटर्स फ़्रॉम डार्कर वर्ल्डस

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मेरीदा, मैक्सिको"मृतकों का दिवस"

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यूकाटन प्रायद्वीप में मेरीदा वह जगह है

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00:01:13,115 --> 00:01:18,704
जहाँ हमारे ग्रह कासबसे बड़ा महाप्रलय घटित हुआ था।

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00:01:19,162 --> 00:01:22,416
एक पूरा क्षुद्रग्रह यहीं आकर टकराया था।

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00:01:23,125 --> 00:01:27,379
यह मनुष्यों के जन्म सेकई करोड़ साल पहले हुआ था,

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00:01:27,462 --> 00:01:32,217
लेकिन फिर भी यह आग के गोले की प्रथापुनर्निरूपण प्रतीत होती है।

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00:01:33,135 --> 00:01:37,222
निश्चित तौर पर,प्राचीन माया लोगों को यह नहीं पता होगा।

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00:01:42,394 --> 00:01:44,897
हमें नहीं पता भविष्य मेंहम पर क्या आने वाला है...

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00:01:44,980 --> 00:01:45,981
चेल्याबिन्स्क, साइबेरिया

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00:01:46,064 --> 00:01:47,983
...जो अंततः हमारा विनाश कर देगा।

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00:01:48,483 --> 00:01:52,154
पर वह दिखेगा तो साइबेरिया केऊपर दिखने वाले इस आग के गोले की तरह,

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00:01:52,237 --> 00:01:54,239
बस इससे कहीं बड़ा होगा।

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00:01:56,658 --> 00:01:59,411
डैशबोर्ड पर लगे साधारण कैमरों नेजो रिकॉर्ड किया,

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00:01:59,494 --> 00:02:01,788
वह एक वैज्ञानिक कल्पना जैसा लगता है।

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00:02:32,694 --> 00:02:34,905
ब्रह्माण्ड के अंधेरे हिस्सों से,

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00:02:34,988 --> 00:02:38,408
दूसरी दुनिया के लोग आ चुके हैं।

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00:02:38,492 --> 00:02:41,370
और अनगिनत लोग अभी भी आने वाले होंगे।

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00:02:45,207 --> 00:02:46,834
वोल्फ़ क्रीक क्रेटरपश्चिम ऑस्ट्रेलिया

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00:02:46,917 --> 00:02:49,461
अगर कुछ बड़ा होना होगा,

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00:02:49,545 --> 00:02:53,215
तो वह दिन की रोशनी में भीआसमान को प्रकाशित कर देगा।

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00:02:53,757 --> 00:02:56,844
पर वह सब शायद अभी लाखों साल बाद हो।

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00:03:00,806 --> 00:03:04,309
उल्का-पिंड हमारे ग्रह सेहमेशा से टकराते रहे हैं,

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00:03:04,393 --> 00:03:08,063
और बड़े उल्का-पिडों ने तोपूरे भूदृश्य बदल दिए हैं।

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00:03:08,939 --> 00:03:12,734
पर उन्होंने संस्कृतियों पर भीगहरा असर छोड़ा है।

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00:03:14,069 --> 00:03:16,655
इसका एक अच्छा उदाहरण है इस्लामी संस्कृति।

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00:03:17,155 --> 00:03:19,491
प्राचीन परंपरा के अनुसार,

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00:03:19,575 --> 00:03:23,120
अल्लाह ने जन्नत से एक पत्थर नीचे भेजा,

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00:03:23,203 --> 00:03:27,374
आदम और हव्वा का मार्गदर्शन करने के लिएकि वेदी कहाँ बनाई जाए।

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00:03:29,209 --> 00:03:31,128
उल्का-पिंड उस जगह नीचे आया

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00:03:31,211 --> 00:03:34,590
जहाँ बाद में पवित्र शहर,मक्का का निर्माण हुआ।

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00:03:38,468 --> 00:03:41,597
मक्का, सऊदी अरब

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00:03:41,680 --> 00:03:45,559
हम यहाँ इस्लामी दुनिया केसबसे पवित्र स्थान पर हैं।

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00:03:46,185 --> 00:03:48,187
इसके मध्य में है, काबा।

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00:03:48,687 --> 00:03:52,065
इसके पूर्वी कोने में गड़ा हुआ है,काला पत्थर।

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00:03:52,649 --> 00:03:56,278
पैगंबर मुहम्मद के इस्लाम कीस्थापना करने से कम से कम

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00:03:56,361 --> 00:04:01,825
एक हज़ार वर्ष पहले से भीइसकी पूजा की जाती थी।

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00:04:04,369 --> 00:04:08,207
काला पत्थर चारों ओर सेचाँदी में मढ़ा हुआ है

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00:04:08,290 --> 00:04:11,251
और किसी को भीउसका विश्लेषण नहीं करने दिया जाता,

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00:04:11,335 --> 00:04:14,463
पर यह लगभग निश्चित हैकि यह एक उल्का-पिंड है।

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00:04:18,759 --> 00:04:23,013
इस्लाम धर्म मेंक़रीब 190 करोड़ लोग श्रद्धा रखते हैं।

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00:04:23,430 --> 00:04:24,681
तीर्थयात्रियों के लिए,

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00:04:24,765 --> 00:04:28,602
काला पत्थर परम पूजनीय है।

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00:04:29,102 --> 00:04:33,774
इसे अनगिनत लोग हाथ से छूते और चूमते हैं।

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00:04:35,692 --> 00:04:41,114
गैर-मुस्लिम होने के कारण, हमें इसपवित्र शहर में कदम भी नहीं रखने दिया जाता,

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00:04:41,823 --> 00:04:46,870
और इसलिए हमें एक श्रद्धालु के मोबाइल सेखींची गई तस्वीरों पर ही निर्भर करना पड़ा।

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00:05:13,689 --> 00:05:18,277
वापस इस शांत, विशालऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तान में।

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00:05:21,238 --> 00:05:24,533
कैम्ब्रिज यूनीवर्सिटी के क्लाइव ओपेनहेमर,

51
00:05:24,616 --> 00:05:29,121
जिन्होंने हमारी इस फ़िल्म की यात्राआरंभ की थी, मुझे बता रहे हैं...

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00:05:30,622 --> 00:05:35,294
वैज्ञानिकों को धरती में बनेइस विशाल गड्ढे का पता सन् 1947 में ही लगा,

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00:05:35,377 --> 00:05:37,379
जब यह ऊपर हवा में से नज़र आया।

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00:05:37,921 --> 00:05:41,133
और यह गड्ढा करीब एक किलोमीटर चौड़ा है।

55
00:05:41,216 --> 00:05:42,217
क्लाइव ओपेनहेमर

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00:05:42,301 --> 00:05:46,388
और यह तब बना जबलौह क्षुद्रग्रह का एक टुकड़ा,

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00:05:47,097 --> 00:05:51,518
जिसका नाप युद्धपोत जितना था और जो 15 किमीप्रति सेकंड की रफ़्तार से आकर

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00:05:51,602 --> 00:05:53,812
धरती से टकराया।

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00:05:54,313 --> 00:05:58,275
और यहाँ धरती पर इस गड्ढे की दीवारें

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00:05:58,358 --> 00:06:00,194
प्राचीन पत्थरों से बनी हैं

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00:06:00,277 --> 00:06:03,447
जो टकराव के कारण चूर-चूर होकरइधर-उधर बिखर गए थे।

62
00:06:04,281 --> 00:06:10,329
वह उल्का ख़ुद तो लगभग पूरा वाष्पित हो गया,

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00:06:10,871 --> 00:06:12,998
और उसके कुछ ही टुकड़े

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00:06:13,081 --> 00:06:17,169
आसपास के रेगिस्तान मेंबिखरे पड़े मिले हैं।

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00:06:19,755 --> 00:06:21,840
धमाके से बाहर गिरी चीज़ों की आकृति से

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00:06:21,924 --> 00:06:26,094
लगता है कि उल्का उस दिशा से आई।

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00:06:26,929 --> 00:06:29,223
उस समय इतना असाधारण तापमान होता है

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00:06:29,306 --> 00:06:32,059
कि उससे एक विशालऊष्मीय धुएँ का गुबार उत्पन्न होता है

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00:06:32,142 --> 00:06:34,937
जो वायुमंडल को चीरता हुआसमताप मण्डल तक जाता है,

70
00:06:35,020 --> 00:06:40,025
और बहुत बड़े क्षेत्र मेंपिघला हुआ मलबा बरसता है।

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00:06:40,108 --> 00:06:43,278
और बेशक़, उस टकराव से

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00:06:43,820 --> 00:06:46,448
विशाल भूकंपीय ऊर्जा उत्पन्न होती है,

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00:06:46,532 --> 00:06:47,699
जिसके कारण आते हैं बड़े भूकंप।

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00:06:47,783 --> 00:06:50,452
यहाँ पर तो हम रेगिस्तान के बीच में हैं,

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00:06:50,536 --> 00:06:56,750
पर अगर आप आज के शहरी माहौल मेंऐसा कुछ होने की कल्पना करो,

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00:06:56,834 --> 00:06:59,086
तो उससे तबाही मच जाएगी।

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00:06:59,169 --> 00:07:02,881
कभी कोई उल्का-पिंड किसी से टकराया नहीं?

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00:07:02,965 --> 00:07:08,387
एक महिला थी जिसे एक उल्का-पिंड लगा था

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00:07:08,470 --> 00:07:11,348
जो उसकी छत के बीच में से आकर

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00:07:11,431 --> 00:07:15,269
उसे लगा जब वह कुरसी पर बैठीटीवी देख रही थी।

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00:07:15,352 --> 00:07:16,603
सायलाकॉगा उल्का-पिंड।

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00:07:16,687 --> 00:07:18,021
30 नवंबर, 1954दोपहर 12:46 बजे

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00:07:18,897 --> 00:07:21,441
वह जीवित तो बच गईपर उसे बहुत बड़ी चोट लगी थी।

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00:07:21,525 --> 00:07:24,236
एन हॉजेससायलाकॉगा, अलाबामा

85
00:07:27,990 --> 00:07:32,411
चाहे गड्ढे के आसपास का क्षेत्रकाफ़ी उजाड़ और सूना लगता है,

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00:07:32,494 --> 00:07:35,956
इस जगह पर आदिवासी लोग हमेशा से रहते थे।

87
00:07:37,165 --> 00:07:39,376
उनमें से कई लोग कलाकार के तौर परआजीविका कमाते हैं।

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00:07:39,459 --> 00:07:40,460
बिलीलूना कला केन्द्र

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00:07:40,544 --> 00:07:43,881
जैसे कि सबसे क़रीब का बिलीलूना का समुदाय।

90
00:07:45,174 --> 00:07:49,887
एक लाख साल से पहले हुई घटना का प्रभावउन्होंने नहीं देखा हो सकता

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00:07:49,970 --> 00:07:52,139
पर हाल ही में कुछ अन्य घटनाएँ हुईं

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00:07:52,222 --> 00:07:54,850
जिन्होंने शायदउनकी लोक स्मृति को झकझोरा हो।

93
00:07:55,559 --> 00:08:00,314
उनके चित्रों में, अकसर यह गड्ढारूपांकन के तौर पर नज़र आता है,

94
00:08:00,397 --> 00:08:02,482
पर इसका महत्व इससे कहीं गहरा है।

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00:08:04,776 --> 00:08:06,653
हम केटी डार्की से मिले

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00:08:06,737 --> 00:08:09,781
जो समुदाय केसबसे अच्छे कलाकारों में से है।

97
00:08:09,865 --> 00:08:12,242
यह आपका बनाया हुआ चित्र है, है ना?

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00:08:12,326 --> 00:08:13,744
चलिए इसे देखते हैं।

99
00:08:17,456 --> 00:08:19,875
अब हमें बताइए यहाँ हम यह क्या देख रहे हैं।

100
00:08:19,958 --> 00:08:21,126
यह बहुत सुंदर चित्र है।

101
00:08:21,210 --> 00:08:22,586
यह रेत की पहाड़ी है...

102
00:08:23,754 --> 00:08:25,506
और यह घास है।

103
00:08:25,589 --> 00:08:28,342
और इसमें कहीं "कांडी" नहीं है।कोई आलू नहीं।

104
00:08:28,425 --> 00:08:29,426
केटी डार्कीचित्रकार

105
00:08:29,510 --> 00:08:32,429
बहुत समय पहले की बात है,बूढ़े लोग बताते हैं...

106
00:08:34,847 --> 00:08:38,769
एक आदमी पक्षियों का शिकार करने गयाऔर कई नदियों-नालों में से गुज़रा।

107
00:08:38,852 --> 00:08:43,857
पर वह नदी के नीचे बनीएक सुरंग में से जा रहा था,

108
00:08:44,608 --> 00:08:46,151
पर हम इसे नाला कहते हैं।

109
00:08:46,235 --> 00:08:48,946
और वह गड्ढे के दूसरी ओर बाहर निकला

110
00:08:49,446 --> 00:08:54,618
और फिर चलकर वापस उस जगह गयाजहाँ से वह आया था

111
00:08:55,244 --> 00:08:56,495
जब वह शिकार कर रहा था।

112
00:08:57,955 --> 00:09:01,917
और इस कहानी में, यह गड्ढा,यह कैसे बना था?

113
00:09:02,000 --> 00:09:03,168
इसकी उत्पत्ति कैसे हुई?

114
00:09:03,794 --> 00:09:07,381
कार्तिया (गैर-आदिवासी) लोग कहते हैंवहाँ उल्का-पिंड गिरा था।

115
00:09:07,464 --> 00:09:10,926
-यह हमारी कहानी है, श्वेत लोगों की कहानी।-श्वेत लोगों की कहानी।

116
00:09:11,009 --> 00:09:13,929
कुछ लोग कहते हैं वहाँ कोई तारा गिरा था।

117
00:09:15,222 --> 00:09:17,891
पर हमारे पूर्वजोंऔर वृद्ध लोगों ने हमें बताया है

118
00:09:18,642 --> 00:09:21,353
कि वह इंद्रधनुषी सर्प थाजो गड्ढे में गिर गया था।

119
00:09:22,062 --> 00:09:25,774
तो ऐसे हमने गड्ढे के बारे मेंतीन अलग कहानियाँ सुनी हैं।

120
00:09:25,858 --> 00:09:27,359
पर वे मिलकर एक हो जाती हैं।

121
00:09:28,902 --> 00:09:30,487
हम हमेशा बच्चों को लेकर जाते हैं।

122
00:09:31,405 --> 00:09:34,116
हर सप्ताहांत हम जाकर वहाँ समय बिताते हैं।

123
00:09:34,199 --> 00:09:39,830
और वहाँ हमें अपने पूर्वजोंऔर हमारे परिवार की उपस्थिति महसूस होती है,

124
00:09:40,330 --> 00:09:44,710
कि वे हमारा ध्यान रखते हैंजब हम गड्ढे के पास जाकर समय बिताते हैं।

125
00:09:45,961 --> 00:09:47,963
वह हमारे लिए बहुत ख़ास जगह है।

126
00:09:48,463 --> 00:09:51,216
हमारे परिवारों के लिए भी।

127
00:10:30,047 --> 00:10:32,883
उल्का-पिंड जहाँ-तहाँ, कहीं भी गिरे हैं।

128
00:10:32,966 --> 00:10:36,845
एक फ़्रांस के ऐल्सस क्षेत्र में गिरा,जो बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

129
00:10:39,014 --> 00:10:44,394
यहाँ उसने मानवीय मसले बदल दिए।इतिहास पर असर डाला।

130
00:11:09,086 --> 00:11:12,130
थोड़ी दूर, एन्सिसहाइम शहर है।

131
00:11:12,548 --> 00:11:13,715
एन्सिसहाइमऐल्सस, फ़्रांस

132
00:11:13,799 --> 00:11:17,636
सोलहवीं सदी में,यहाँ विश्व का इतिहास रचा गया था,

133
00:11:17,719 --> 00:11:21,431
क्योंकि एक गिरते हुए पत्थर के द्वाराहैप्सबर्ग साम्राज्य ने

134
00:11:21,515 --> 00:11:23,767
वैधता प्राप्त की।

135
00:11:24,935 --> 00:11:27,771
जहाँ वह गिरा था,वह जगह एक फ़लक लगाकर चिह्नित की गई है।

136
00:11:31,817 --> 00:11:34,778
क्लाइव, कैम्ब्रिज यूनीवर्सिटी केअपने एक सहयोगी,

137
00:11:34,862 --> 00:11:36,864
साइमन शाफ़र को लेकर आए।

138
00:11:36,947 --> 00:11:38,365
साइमन शाफ़रकैम्ब्रिज यूनीवर्सिटी

139
00:11:38,448 --> 00:11:43,662
वह एक विज्ञान के इतिहासकार हैंऔर गिने-चुने बचे बहुश्रुतों में से एक हैं।

140
00:11:44,621 --> 00:11:49,376
क्या हुआ था उस दिन...सात नवंबर, 1492, को?

141
00:11:49,960 --> 00:11:53,839
तो, उस अनोखे दिन,

142
00:11:53,922 --> 00:11:58,468
दक्षिणपूर्वी आकाश में उस दिशा सेएक आग का गोला प्रकट हुआ,

143
00:11:58,552 --> 00:12:03,223
जो सीटी की आवाज़ें निकालता हुआबहुत तेज़ी से आ रहा था।

144
00:12:03,307 --> 00:12:08,729
और फिर सुबह के 11:30 बजेवह आकर इस मैदान में टकराया।

145
00:12:09,188 --> 00:12:11,940
ज़्यादातर ख़बरों के अनुसार,

146
00:12:12,024 --> 00:12:14,651
उस समय मैदान में केवल एक व्यक्ति खड़ा था।

147
00:12:14,735 --> 00:12:16,069
एक गड़रिया।

148
00:12:16,153 --> 00:12:18,488
और उसने एक बहुत अद्भुत चीज़ देखी होगी।

149
00:12:18,572 --> 00:12:24,244
उसे दिखा होगा कि एक 300 पाउंड कापत्थर आकर मैदान से टकराया

150
00:12:24,328 --> 00:12:26,872
और ज़मीन में एक बड़ा गड्ढा कर दिया।

151
00:12:27,497 --> 00:12:30,792
सात नवंबर, 1492,

152
00:12:30,876 --> 00:12:33,962
वह क्षण जब यह पत्थर गिरा

153
00:12:34,046 --> 00:12:40,093
एक और महत्वपूर्ण स्थलावतरण केकुछ ही दिन बाद हुआ था:

154
00:12:40,177 --> 00:12:43,722
क्रिस्टोफ़र कोलंबस और उनके दल का

155
00:12:43,805 --> 00:12:47,017
कैरीबियन में, उनकी नई दुनिया में आगमन।

156
00:12:48,101 --> 00:12:50,729
अंततः, यह कोलंबस की ही मेहरबानी है

157
00:12:50,812 --> 00:12:53,899
कि इस खेत में मकई उग रही है।

158
00:12:53,982 --> 00:12:59,279
यह यूरोपाई कृषि में उन फसलों केप्रकटीकरण का नतीजा है

159
00:12:59,363 --> 00:13:02,866
जो तब तक केवलअमरीकी महाद्वीपों पर ही उगती थीं।

160
00:13:03,367 --> 00:13:07,287
वास्तव में,उस पत्थर का गिरना इतना महत्वपूर्ण था

161
00:13:07,371 --> 00:13:11,834
कि सन् 1492 के बारे मेंबताने वाले कुछ वृत्तांतों में तो

162
00:13:11,917 --> 00:13:14,920
केवल एन्सिसहाइम पत्थर का ही ज़िक्र है

163
00:13:15,003 --> 00:13:17,089
और कोलम्बस का नाम तक नहीं है।

164
00:13:18,590 --> 00:13:23,595
उन लोगों के विचार में,शायद ईश्वरीय इच्छा से वह एक

165
00:13:23,679 --> 00:13:27,641
महत्वपूर्ण शहर, ऐल्सस के

166
00:13:27,724 --> 00:13:30,102
एन्सिसहाइम के बहुत पास गिरा।

167
00:13:30,185 --> 00:13:32,104
उस समय एन्सिसहाइम

168
00:13:32,187 --> 00:13:36,483
दुनिया के इस हिस्से मेंऑस्ट्रियाई फ़ौजों का

169
00:13:36,567 --> 00:13:38,318
मुख्यालय था।

170
00:13:38,402 --> 00:13:42,489
और पत्थर के गिरने के दो सप्ताह के अंदर,

171
00:13:42,990 --> 00:13:46,076
ऑस्ट्रियन फ़ौज का नायक,

172
00:13:46,159 --> 00:13:50,581
उनका सेनाध्यक्ष,मैक्सीमिलियन, भी शहर में आ गया।

173
00:13:51,957 --> 00:13:56,295
पर, भगवान के लिए, बताओ तोयह पत्थर उस समय यहाँ क्यों गिरा?

174
00:13:56,378 --> 00:14:02,885
इस पत्थर का इस खेत में गिरने का कारणभगवान के लिए ही था।

175
00:14:03,510 --> 00:14:04,887
उन लोगों के लिए,

176
00:14:05,387 --> 00:14:09,349
आकाश से आए चमत्कारिकअलौकिक संकेत, संदेश होते थे।

177
00:14:09,433 --> 00:14:12,936
यह एक तरह से उनके लिएमैक्सीमिलियन की प्रजा को

178
00:14:13,020 --> 00:14:15,647
भगवान द्वारा भेजा गया ई-मेल था,

179
00:14:15,731 --> 00:14:18,066
यह बताने के लिए कि उसका शासन जायज़ है,

180
00:14:18,150 --> 00:14:19,943
कि वह अपने दुश्मनों को हराएगा,

181
00:14:20,027 --> 00:14:22,321
और उन्हें उसके आदेश मानने चाहिए।

182
00:14:22,404 --> 00:14:24,489
आप इनकी ओर इतने आकर्षित क्यों हैं?

183
00:14:24,948 --> 00:14:29,828
शायद उल्का-पिंडों की एक चीज़जिसके कारण मुझ पर इनका जुनून सवार है,

184
00:14:29,912 --> 00:14:35,042
वह यह है कि इनसे कुछ आभास होता है,इनका कुछ मतलब होता है।

185
00:14:35,125 --> 00:14:40,005
यह आते हैं, या ऐसा सोचा जाता था,अन्य प्रकार की गिरती चीज़ों के साथ।

186
00:14:40,088 --> 00:14:45,802
जैसे कि शरीर के टुकड़ोंऔर मेंढकों और खूनी बारिशों के साथ।

187
00:14:45,886 --> 00:14:48,472
प्लेग और अन्य विपत्तियों के साथ।

188
00:14:48,555 --> 00:14:53,185
उल्का-पिंड जैसी चीज़ एक जीव है,

189
00:14:53,268 --> 00:14:56,480
लगभग एक जानवर समझ लीजिए,जो हमसे बात करता है।

190
00:14:56,563 --> 00:15:00,192
और यह मुझे बहुत शक्तिशालीऔर भावपूर्ण विचार लगता है।

191
00:15:00,275 --> 00:15:06,281
यह विचार कि...उल्का-पिंडों का कुछ अर्थ होता है,

192
00:15:07,157 --> 00:15:11,995
और मानवता का काम है,यह समझना कि वह क्या अर्थ है।

193
00:15:13,038 --> 00:15:15,624
बिना उबाऊ हुए, साइमन शाफ़र,

194
00:15:15,707 --> 00:15:20,045
अगले आठ घंटों तक,लगातार बोलना जारी रख सकते थे।

195
00:15:20,128 --> 00:15:25,050
पर हम स्थानीय संग्रहालय मेंअसली पत्थर के अवशेष देखना चाहते थे।

196
00:15:26,093 --> 00:15:29,680
वह कल्पनाओं को आमंत्रित करता है,अवास्तविक लगता है।

197
00:15:31,682 --> 00:15:35,102
शहर का मेयर हमसे मिलना चाहता था।

198
00:15:35,185 --> 00:15:38,856
यहाँ वह उल्का-पिंड के दोस्तों के साथ हैं।

199
00:15:40,065 --> 00:15:43,986
यह प्रतीक एक मध्यकालीनलकड़ी के साँचे से लिया गया है।

200
00:15:44,570 --> 00:15:46,321
यह आपको हर जगह दिखाई देंगे।

201
00:15:47,781 --> 00:15:53,537
पर आज इसका मतलब है सदियों पुराने अतीतऔर सदियों आगे के भविष्य के बारे में सोचना।

202
00:15:54,872 --> 00:15:58,417
क्या यह "ब्रदरहुड ऑफ़ द स्टोन" के सदस्य

203
00:15:58,500 --> 00:16:01,420
किसी बहुत आगे केभविष्य के बारे में सोच रहे हैं?

204
00:16:02,129 --> 00:16:03,964
उनके मन में क्या चल रहा है?

205
00:16:04,548 --> 00:16:07,718
इनकी क्या दूरगामी योजनाएँ हैं?

206
00:16:09,678 --> 00:16:12,806
क्या होगा अगर मानव जाति लुप्त हो गई?

207
00:16:14,016 --> 00:16:19,313
किसी दूसरी आकाशगंगा से आनेवाले भविष्य केअंतरिक्षयात्रियों को यह दिखाने के लिए

208
00:16:19,396 --> 00:16:24,276
कि हम अपने घायल साथी को अकेला नहीं छोड़ते,हम क्या छोड़ कर जाएँगे?

209
00:16:25,861 --> 00:16:30,616
पत्थर के साथ ही,हमें यह मीडिया प्रस्तुतीकरण दिखा।

210
00:16:36,330 --> 00:16:38,248
"हैलो, मेरा नाम जॉन है,"

211
00:16:38,332 --> 00:16:42,503
प्रतिकृति कहती है, इस आशा में कि दूसरेग्रह के लोगों को फ़्रेंच आती होगी।

212
00:16:42,586 --> 00:16:44,379
"मैं एक खनिक हूँ।

213
00:16:44,463 --> 00:16:47,508
और हमारी दुनिया इतनी सुंदर दिखती थी।"

214
00:16:49,510 --> 00:16:53,805
"जब हमारे ग्रह के लिए खतरारात के आकाश में प्रकट हुआ,

215
00:16:54,223 --> 00:16:55,807
तो हमने कुछ पूर्वोपाय किए।

216
00:16:56,225 --> 00:17:00,103
हमने सुरंगें खोदींऔर भूमिगत आश्रयस्थान बनाए।

217
00:17:00,562 --> 00:17:04,441
हमें लगता हैहम पूरे एक दशक तक बच सकते हैं।

218
00:17:05,192 --> 00:17:07,528
अगर कोई बड़ा आग का तूफान आया,

219
00:17:07,611 --> 00:17:11,156
तो मुझे यकीन हैकि मानव जाति उससे बच जाएगी।

220
00:17:11,823 --> 00:17:15,035
पर मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूँ।मैं तो केवल एक खनिक हूँ।"

221
00:17:18,372 --> 00:17:20,958
"आपकी यात्रा के सुखद अंत के लिएमेरी शुभकामनाएँ।"

222
00:17:34,471 --> 00:17:36,223
वॉलहाल एरीना

223
00:17:36,306 --> 00:17:37,307
ओस्लो, नॉर्वे

224
00:17:37,391 --> 00:17:42,062
अगला गंतव्य, ओस्लो, नॉर्वे मेंएक बड़ा खेलों का क्रीड़ांगन।

225
00:17:43,856 --> 00:17:48,485
यह इतना बड़ा हैकि इसमें एक पूरा फ़ुटबॉल का मैदान है।

226
00:17:49,945 --> 00:17:52,823
पर हमारी दिलचस्पी थी उसकी छत में,

227
00:17:52,906 --> 00:17:56,785
और एक व्यक्ति में जिसका नाम है यॉन लारेसन,

228
00:17:56,869 --> 00:17:59,079
जो नॉर्वे का सबसे मशहूर जैज़ संगीतकार है।

229
00:17:59,162 --> 00:18:00,163
यॉन लारेसन

230
00:18:01,206 --> 00:18:03,792
पर यहाँ इस बड़ी छत पर उनके होने का

231
00:18:03,876 --> 00:18:07,462
कारण है उनका एक नागरिक वैज्ञानिक होना।

232
00:18:26,732 --> 00:18:29,610
यह सब कैसे शुरू हुआ?आपने यह जगह कैसे ढूँढी?

233
00:18:30,319 --> 00:18:33,780
मैंने... गूगल अर्थ पर ढूँढा

234
00:18:33,864 --> 00:18:37,451
और यह मुझे सबसे बड़ी छत दिखी।

235
00:18:37,534 --> 00:18:42,539
और उन दिनों यह खेल क्रीड़ांगनशायद ओस्लो में सबसे बड़ा था।

236
00:18:42,956 --> 00:18:45,542
और फिर मैंने देखा कि...

237
00:18:46,502 --> 00:18:50,714
छोटी चीज़ें इस पर से लुढ़क करयहाँ इकट्ठी हो जाएँगी

238
00:18:50,797 --> 00:18:52,716
और नाली के पास पहुँच कर रुक जाएँगी।

239
00:18:52,799 --> 00:18:56,428
और जैसा कि हम देख सकते हैं,यहाँ बहुत गंदगी है

240
00:18:56,512 --> 00:18:59,806
पर इसी के बीच में हमेंब्रह्मांडीय धूल के कण भी मिलेंगे।

241
00:19:00,516 --> 00:19:01,975
आपने यह कैसे शुरू किया?

242
00:19:02,059 --> 00:19:06,522
आप चार दशक से एक सफल संगीतकार रहे हैं।

243
00:19:07,105 --> 00:19:10,817
आप छतों पर कैसे पहुँच गए?क्या अपने प्रशंसकों से बचना चाहते थे?

244
00:19:10,901 --> 00:19:14,780
नहीं। मैंने हमेशा से पत्थर इकट्ठे किए हैंऔर भूविज्ञान में मेरी दिलचस्पी रही है।

245
00:19:14,863 --> 00:19:17,950
पूरी ज़िंदगी यह मेरा शौक रहा है।

246
00:19:18,033 --> 00:19:23,789
तो दस साल पहले, एक सुबहमैं बाहर बैठ कर नाश्ता कर रहा था

247
00:19:23,872 --> 00:19:28,627
जब अचानक मैंने अपनी मेज़ परएक चमकता काला बिंदु देखा

248
00:19:28,710 --> 00:19:31,505
जो दो सेकंड पहले तक वहाँ नहीं था।

249
00:19:31,588 --> 00:19:33,423
मैंने उसे अपनी उँगली से उठाया

250
00:19:33,507 --> 00:19:36,927
और एक शौकिया खनिज-विज्ञानी कीमेरी पृष्ठभूमि के कारण,

251
00:19:37,010 --> 00:19:39,680
मैं देख सकता था,"वाह, यह तो दरअसल एक छोटा पत्थर है।"

252
00:19:40,264 --> 00:19:41,598
और हम सोचने लगे,

253
00:19:41,682 --> 00:19:45,602
"यह कहाँ से आया होगा?क्या यह अंतरिक्ष से है? मुझे नहीं पता।"

254
00:19:45,686 --> 00:19:49,815
पर फिर मैंने गूगल करना शुरू कियाऔर मुझे पता चला

255
00:19:49,898 --> 00:19:54,987
कि सूक्ष्म उल्कापिंड नामक कुछ अजीब छोटे

256
00:19:55,070 --> 00:19:56,405
ब्रह्मांडीय धूल के कण होते हैं।

257
00:19:56,488 --> 00:19:57,614
और तब यह सब शुरू हुआ।

258
00:19:57,698 --> 00:19:59,074
और आपको लगता है यहाँ पर वे हैं।

259
00:19:59,157 --> 00:20:02,494
इस गंदगी को उठाने के लिएकैसे उपकरण चाहिए?

260
00:20:03,203 --> 00:20:05,289
मेरा मुख्य हथियार है यह चुम्बक।

261
00:20:05,372 --> 00:20:08,208
और यह चुम्बकमैं इसलिए इस्तेमाल करता हूँ क्योंकि...

262
00:20:08,792 --> 00:20:10,961
सूक्ष्म उल्कापिंड चुम्बकीय होते हैं।

263
00:20:11,044 --> 00:20:14,173
पहले तो मैं चुम्बक को ही

264
00:20:14,256 --> 00:20:17,593
एक छोटे ज़िपलॉक प्लास्टिक केलिफ़ाफ़े में डालता हूँ, ऐसे।

265
00:20:18,635 --> 00:20:20,929
और उससे हुक आराम से पकड़ी जाती है...

266
00:20:21,013 --> 00:20:25,934
हैरानी की बात है कि ऐसे साधारणउपकरणों के साथ यॉन लारेसन ने

267
00:20:26,018 --> 00:20:29,646
विज्ञान की एक पूरी तरहनई शाखा शुरू कर दी है।

268
00:20:30,022 --> 00:20:33,275
और यह हमारा नमूना चुनने का क्षेत्र होगा।

269
00:20:33,358 --> 00:20:35,694
मैं इसे ज़मीन पर घुमाऊँगा, इस तरह।

270
00:20:37,070 --> 00:20:42,201
भारी कण लुढ़क जाएँगेऔर सबसे भारी हिस्से पर रहेंगे।

271
00:20:42,993 --> 00:20:46,830
यह कुछ अति सूक्ष्मचुम्बकीय कण हो सकते हैं।

272
00:20:47,372 --> 00:20:49,791
मैं इन्हें बाद मेंमाइक्रोस्कोप से देखूँगा।

273
00:20:49,875 --> 00:20:53,754
इन अंतरिक्ष के कणों की प्रतिदिनपृथ्वी की ओर प्रवाह की क्या दर है?

274
00:20:53,837 --> 00:20:55,297
क्या हमारे पास कोई आँकड़े हैं?

275
00:20:55,380 --> 00:20:57,799
हाँ, लगभग 100 मैट्रिक टन।

276
00:20:57,883 --> 00:21:04,181
समझ लो कि रेत के दो बड़े ट्रक प्रतिदिनपृथ्वी के ऊपर ब्रह्मांडीय धूल डाल रहे हैं।

277
00:21:04,264 --> 00:21:08,101
पर वह हर साल प्रति वर्ग मीटर में

278
00:21:08,185 --> 00:21:11,855
एक कण के बराबर हुआ।

279
00:21:12,314 --> 00:21:14,942
यह कण संदेशवाहक होते हैं, है ना?

280
00:21:15,025 --> 00:21:17,861
यह आपके लिए कोई ख़ास संदेश लगता है।

281
00:21:17,945 --> 00:21:19,029
हाँ, मेरे लिए तो यह है।

282
00:21:19,112 --> 00:21:22,824
और यह सृष्टि की सबसे पुरानी वस्तु है।

283
00:21:23,408 --> 00:21:25,202
इससे ज़्यादा दूर तक कुछ नहीं गया है।

284
00:21:25,285 --> 00:21:29,331
जब मैं एक सूक्ष्म उल्कापिंड उठा करअपनी उँगली पर महसूस करता हूँ,

285
00:21:30,082 --> 00:21:34,127
किसी मनुष्य ने इससे पुरानीकिसी वस्तु को नहीं छुआ होगा।

286
00:21:34,211 --> 00:21:38,465
यह सच में जैसे अनंतकाल कोआँख में आँख डालकर देखना है।

287
00:21:38,549 --> 00:21:42,302
यह किसी अन्य पीढ़ी के अवशेष हैं,

288
00:21:42,386 --> 00:21:44,513
मरते सितारों की पिछली पीढ़ी के।

289
00:21:45,055 --> 00:21:49,268
तो इसका एक इतिहास हैजो सृष्टि के आरंभ तक जाता है।

290
00:21:52,187 --> 00:21:53,897
यह हैं यन ब्रेली कीहले,

291
00:21:53,981 --> 00:21:57,901
एक भूवैज्ञानिक जो माइक्रोस्कोप सेयॉन के नमूनों की जाँच करेंगे।

292
00:21:57,985 --> 00:21:59,611
यन ब्रेली कीहले

293
00:21:59,695 --> 00:22:02,072
वायट अर्प जैसी उनकी पोशाक हमें पसंद आई।

294
00:22:02,614 --> 00:22:04,199
इनका जन्म टेक्सास में हुआ।

295
00:22:05,158 --> 00:22:06,660
पर इनके बारे में और भी कुछ विशेष है।

296
00:22:07,286 --> 00:22:09,913
यह चार बार कैंसर को मात दे चुके हैं,

297
00:22:09,997 --> 00:22:14,793
जिनमें से दो बार, इनके अनुसार,मौत छू कर निकली।

298
00:22:15,711 --> 00:22:19,089
कैंसर अनुसंधान मेंयोगदान करने की इच्छा से,

299
00:22:19,173 --> 00:22:24,052
यह अब कैंसर के नए उपचारों केअग्रगामी कार्य में शामिल हैं।

300
00:22:24,553 --> 00:22:25,971
यह अज्ञात जगह है।

301
00:22:26,054 --> 00:22:29,808
यहाँ हम फ़ोटोग्राफ़ किए हुएदस्तावेज़ बनाने की कोशिश करते हैं।

302
00:22:30,601 --> 00:22:32,936
-और यह हैं यन कीहले, मेरे दोस्त।-हैलो।

303
00:22:33,020 --> 00:22:34,479
हम कई सालों से एक साथ काम करके

304
00:22:34,563 --> 00:22:39,610
सूक्ष्म उल्कापिंडों की हाईरेज़ोल्यूशनवाली रंगीन तस्वीरें

305
00:22:40,110 --> 00:22:44,948
इतने बड़े आकार में बनाते हैंजितनी दुनिया में और कहीं नहीं बनतीं।

306
00:22:45,866 --> 00:22:47,659
आपको कितना बड़ा करना होता है?

307
00:22:47,743 --> 00:22:49,995
आप देख सकते हैं कि यह कण इतने छोटे हैं

308
00:22:50,078 --> 00:22:52,289
कि इन्हें देखना संभव ही नहीं है।

309
00:22:52,372 --> 00:22:57,127
हमें 2,000 गुणाया बेहतर होगा, 3,000 गुणा वृद्धि चाहिए।

310
00:22:57,544 --> 00:23:00,964
और फिर पहली फ़ोटो का व्यास एक मीटर होगा।

311
00:23:01,048 --> 00:23:02,132
हमें इतना ही चाहिए।

312
00:23:02,549 --> 00:23:04,718
पता है, जब सब कहते हैं यह असंभव था,

313
00:23:04,801 --> 00:23:07,596
अब हमने एक बिल्कुलनए किस्म का विज्ञान बना दिया है।

314
00:23:07,679 --> 00:23:12,309
और तुम्हें याद है हमारेसहयोगियों की क्या प्रतिक्रिया थी।

315
00:23:12,392 --> 00:23:14,645
-उनका हँस-हँस कर बुरा हाल था...-हाँ। ओह, हाँ।

316
00:23:14,728 --> 00:23:17,689
...जब उन्होंने हमें पूछा,"क्या करने वाले हो तुम? क्या?

317
00:23:18,148 --> 00:23:20,192
सब जानते हैं कि यह असंभव है।

318
00:23:20,275 --> 00:23:24,488
जानते हो ना, संकेत ध्वनि अनुपात,एक बटा एक अरब से भी ऊपर होता है।

319
00:23:24,571 --> 00:23:25,739
करके दिखाओ तो जानें।"

320
00:23:27,241 --> 00:23:29,868
क्या उससे आपको बुरा लगा, उस समय?

321
00:23:29,952 --> 00:23:31,078
बिल्कुल नहीं।

322
00:23:31,703 --> 00:23:33,330
विज्ञान में ऐसे ही काम होता है।

323
00:23:33,413 --> 00:23:37,042
यहाँ भावनाओं का कोई काम नहीं।यह बस जिज्ञासा के बारे में है।

324
00:23:37,668 --> 00:23:39,962
तो यह आज ही का है।

325
00:23:40,754 --> 00:23:43,799
जब हम इस प्रकार कीविशेष संरचना देखते हैं तो समझ जाते हैं,

326
00:23:43,882 --> 00:23:48,136
"अच्छा, यह सूक्ष्म उल्कापिंड हैऔर कोई औद्योगिक कण नहीं है।"

327
00:23:48,220 --> 00:23:50,264
और ज़ाहिर हैअभी यह काफ़ी धुँधला है।

328
00:23:50,347 --> 00:23:52,432
क्या हम... क्या हम इसकी फ़ोटो ले सकते हैं?

329
00:23:53,267 --> 00:23:54,643
-हम... नहीं।-नहीं।

330
00:23:54,726 --> 00:23:55,811
अगर हम बस...

331
00:23:55,894 --> 00:24:00,148
हमारे दिल की धड़कनें, अगर हम ज़्यादाजोश में आ जाएँ, तो विघ्न उत्पन्न करेंगी।

332
00:24:00,232 --> 00:24:01,275
इसलिए यह संभव नहीं है।

333
00:24:01,358 --> 00:24:04,069
फ़ोटो लेने के समयहमें कमरे से बाहर जाना पड़ता है।

334
00:24:04,778 --> 00:24:07,406
यह सारे कण, दरअसल, आए कहाँ से हैं?

335
00:24:07,489 --> 00:24:10,617
यह अच्छा सवाल हैक्योंकि जवाब हमें भी नहीं पता।

336
00:24:11,118 --> 00:24:13,203
ज़ाहिर है, ये अंतरिक्ष से आए हैं।

337
00:24:13,287 --> 00:24:15,706
इनमें से कुछ तोक्षुद्रग्रह घेरे से आए हैं।

338
00:24:15,789 --> 00:24:17,916
बाकी धूमकेतु संबंधित पदार्थ हो सकते हैं।

339
00:24:18,417 --> 00:24:23,839
पर, यह भी हो सकता है, ये अन्य आकाशगंगाओं,अन्य सौर मंडलों के कण हों।

340
00:24:24,673 --> 00:24:27,759
हमें प्रत्येक कण की अलग सेउत्पत्ति के बारे में नहीं पता।

341
00:24:28,343 --> 00:24:29,803
यह अद्भुत है।

342
00:24:29,887 --> 00:24:33,724
हर मंगलवार की रात कोजब यॉन नई सामग्री लेकर आता है

343
00:24:34,224 --> 00:24:35,726
हम भौंचक्के रह जाते हैं।

344
00:24:35,809 --> 00:24:37,895
हम जैसे फिर से बच्चे बन जाते हैं।

345
00:24:37,978 --> 00:24:41,857
यह कण अंतरिक्ष में भीछोटे और अकेले होते हैं।

346
00:24:41,940 --> 00:24:46,820
कुछ कभी भी इतने बड़े नहीं हुए

347
00:24:46,904 --> 00:24:49,031
जैसे कि, एक इमारत जितने...

348
00:24:49,114 --> 00:24:52,284
जो क्षुद्रग्रह घेरे में छोटे ग्रहों कानिर्माण शुरू कर रहे हों।

349
00:24:52,743 --> 00:24:56,788
यह दरअसल ब्रह्मांडीय धूल है।ब्रह्माण्ड में धूल चारों ओर मिलेगी।

350
00:24:57,289 --> 00:25:01,293
यहाँ ऊपर, उदाहरण स्वरूप,यह लौह-निकल मिश्रित धातु है।

351
00:25:02,920 --> 00:25:07,633
और यहाँ पर क्रिस्टलीकरण कीबड़ी अच्छी शुरुआत है।

352
00:25:07,716 --> 00:25:09,593
केवल काँच से शुरू हुआ है।

353
00:25:10,552 --> 00:25:13,013
और अब इनका क्रिस्टलीकरण होकरऑलिवीन क्रिस्टल बनेंगे।

354
00:25:13,722 --> 00:25:18,227
और यहाँ बाहर लौह सल्फ़ाइड काबहुत बारीक किनारा है।

355
00:25:18,310 --> 00:25:21,355
यह लगभग, एक तरह का,बर्फीला बहिर्ग्रह लगता है।

356
00:25:21,438 --> 00:25:22,898
यह ठोस टुकड़े लगते हैं। हाँ।

357
00:25:22,981 --> 00:25:25,651
हिम शिलाओं के टूटने के कारण।

358
00:25:25,734 --> 00:25:28,153
यह वाला कुछ ख़ास दिलचस्प लगता है।

359
00:25:28,237 --> 00:25:34,117
परिमण्डल में प्रवेश के समयइसका तापमान बहुत ज़्यादा है।

360
00:25:34,201 --> 00:25:36,453
आगे की तरफ़, जो ऊपर है,

361
00:25:36,537 --> 00:25:40,082
यह पृथ्वी के परिमण्डल मेंइसके बढ़ने की दिशा है।

362
00:25:40,165 --> 00:25:45,337
फिर जब इसकी गति कम होनी शुरू होती है,धातु का भारी भीतरी हिस्सा

363
00:25:45,420 --> 00:25:49,049
निष्क्रियता से... आगे धकेला जाता है

364
00:25:49,508 --> 00:25:53,929
और कण के आगे धातु के ढेर जैसा बन जाता है।

365
00:25:54,763 --> 00:25:58,475
फिर, वही ख़ास,आगे की तरफ़, लौह-निकल के साथ।

366
00:25:58,559 --> 00:26:04,147
तो, हालांकि अब तकहमने 2500 अलग-अलग नमूने इकट्ठे किए हैं,

367
00:26:04,231 --> 00:26:05,858
कोई भी दो एक जैसे नहीं हैं।

368
00:26:06,817 --> 00:26:08,861
तो जब आप...

369
00:26:08,944 --> 00:26:11,989
सूक्ष्म उल्कापिंडों और ब्रह्मांडीय धूल केकणों को जानने लगते हैं

370
00:26:12,072 --> 00:26:16,702
तो आपको समझ आएगा कि वे पृथ्वी केस्थलीय भूविज्ञान से बहुत भिन्न हैं।

371
00:26:16,785 --> 00:26:21,164
वे एक गति संबंधी प्रक्रिया सेगुज़रे हैं, अतिवेग से,

372
00:26:21,248 --> 00:26:23,959
बंदूक की गोली से 50 गुणा अधिक गति से

373
00:26:24,418 --> 00:26:26,503
और अत्यंत उच्च तापमान से गुज़रे हैं।

374
00:26:26,587 --> 00:26:29,506
और अंत में ये अंतरिक्ष से आएखजाने की तरह हैं।

375
00:27:08,253 --> 00:27:13,509
जो सुंदरता और विचित्रता हमनेअभी देखी, वह और भी विचित्र बन सकती है।

376
00:27:13,592 --> 00:27:15,219
यह ऐसी आकृति दिखाई देती है।

377
00:27:16,094 --> 00:27:19,556
अगर आप इसे पकड़ कर रखें,तो मैं आगे बोर्ड तक जाकर और...

378
00:27:19,640 --> 00:27:22,476
जिस आकृति काक्लाइव यहाँ प्रक्षेपण कर रहे हैं,

379
00:27:22,559 --> 00:27:26,480
वह ऐसी चीज़ का सबूत हैजिसे असंभव माना जाता था।

380
00:27:26,563 --> 00:27:30,108
यह क्रिस्टलीय स्वरूप केपदार्थ से संबंधित है

381
00:27:30,192 --> 00:27:32,945
जो बिल्कुल असंभव लगता था।

382
00:27:33,028 --> 00:27:35,489
तथाकथित क्वाज़ीक्रिस्टल।

383
00:27:36,281 --> 00:27:37,449
पॉल स्टाइनहार्ड्टप्रिंस्टन यूनीवर्सिटी

384
00:27:37,533 --> 00:27:40,369
यह वह व्यक्ति हैं जिन्होंने उसेअसंभव मानने से इनकार कर दिया।

385
00:27:40,827 --> 00:27:46,750
दुनिया भर में मशहूर ब्रह्माण्ड विज्ञानी,प्रिंस्टन यूनीवर्सिटी के पॉल स्टाइनहार्ड्ट

386
00:27:46,834 --> 00:27:52,881
आपको क्वाज़ीक्रिस्टल का सबूत मिल गया,सृष्टि का प्राकृतिक क्वाज़ीक्रिस्टल

387
00:27:52,965 --> 00:27:55,259
जो उल्का-पिंड में मिला।

388
00:27:55,342 --> 00:27:57,261
पर, क्वाज़ीक्रिस्टल होता क्या है?

389
00:27:58,387 --> 00:28:02,891
क्वाज़ीक्रिस्टल पदार्थ का वह स्वरूप हैजो हम लोगों को असंभव लगता था।

390
00:28:03,392 --> 00:28:07,145
हज़ारों सालों से हमें यक़ीन था कि हमनेसाबित कर दिया है कि यह असंभव है।

391
00:28:08,230 --> 00:28:12,067
पर जैसा अब हम जान चुके हैं,ना केवल यह संभव है,

392
00:28:12,150 --> 00:28:14,611
बल्कि यह बहुत पहलेसृष्टि में बनाया जा चुका है,

393
00:28:14,695 --> 00:28:16,280
हमारे सोचने से भी कहीं पहले।

394
00:28:16,363 --> 00:28:17,990
पर एक सरल चीज़ से शुरुआत करते हैं।

395
00:28:18,824 --> 00:28:21,660
क्रिस्टल की आकृति क्रम में होती है,

396
00:28:21,743 --> 00:28:24,413
आपके बाथरूम के फ़र्श की टाइलों की तरह।

397
00:28:24,496 --> 00:28:27,374
-अच्छा।-सादे चौकोर टुकड़े।

398
00:28:27,457 --> 00:28:30,169
चौकोर टाइलें बिना जोड़ के जुड़ जाती हैं।

399
00:28:30,252 --> 00:28:33,839
पर पंचभुजों के साथ,जहाँ पाँचगुना समरूपता चाहिए

400
00:28:33,922 --> 00:28:35,465
आपके सामने जल्दी हीसमस्या खड़ी हो जाती है।

401
00:28:35,924 --> 00:28:38,177
थोड़ा इस ओर से बाहर निकालते हैं।

402
00:28:38,677 --> 00:28:40,095
और...

403
00:28:40,512 --> 00:28:42,264
मुझे दिख रहा है समस्या कहाँ से आएगी।

404
00:28:42,347 --> 00:28:44,183
हाँ, आपने देखा क्या हो रहा है?

405
00:28:44,266 --> 00:28:47,436
यहाँ रिक्त स्थान बन गया है।तो अब हमें कुछ चयन करने होंगे।

406
00:28:47,519 --> 00:28:49,313
इस जगह को तो हम नहीं भर पाएँगे।

407
00:28:49,396 --> 00:28:51,023
मैं इसे वहाँ रख सकता हूँ या वहाँ,

408
00:28:51,106 --> 00:28:53,192
-पर कभी भी कोई तरीका नहीं होगा जिससे...-हाँ।

409
00:28:54,401 --> 00:28:55,986
परमाणुओं को रिक्त स्थान बिल्कुल नहीं पसंद

410
00:28:56,069 --> 00:28:58,280
तो जैसे ही असली परमाणुओं मेंरिक्त स्थान बनते हैं,

411
00:28:58,363 --> 00:29:00,490
वे इधर-उधर घूम कर उनको भर देंगे।

412
00:29:00,574 --> 00:29:04,077
पदार्थ के लिए पाँचगुना समरूपतापूरी तरह निषिद्ध थी।

413
00:29:04,536 --> 00:29:09,208
पर क्वाज़ीक्रिस्टलइससे भी ज़्यादा जटिल और रहस्यमयी होते हैं।

414
00:29:10,083 --> 00:29:13,545
पहले एक क्वाज़ीक्रिस्टल कीआकृति पर नज़र डाल कर

415
00:29:13,629 --> 00:29:16,298
देख लेते हैं वह कैसे दिखते हैं।

416
00:29:16,381 --> 00:29:20,677
तो, यह मेज़ पर लगी टाइलिंगइसका एक अच्छा उदाहरण है।

417
00:29:20,761 --> 00:29:25,098
अगर आप ध्यान दें तो आपको दिखेगा यहकेवल दो टुकड़ों, इन दो आकृतियों से बनी है।

418
00:29:25,641 --> 00:29:26,808
ये तो चूज़े हैं।

419
00:29:27,684 --> 00:29:30,145
यह बच्चों की पहेली जैसी लगती है,

420
00:29:30,229 --> 00:29:33,315
पर इसके पीछे उच्च स्तर का गणित है।

421
00:29:34,316 --> 00:29:38,487
यह आकृति 70 के दशक मेंसर रॉजर पेनरोज़ ने ढूँढी थी।

422
00:29:39,363 --> 00:29:40,489
सर रॉजर पेनरोज़

423
00:29:40,572 --> 00:29:43,367
एक गणितज्ञ और कभी-कभीएक ब्रह्माण्ड विज्ञानी भी।

424
00:29:44,201 --> 00:29:47,412
हैरानी की बात हैकि एक क्वाज़ीक्रिस्टल आकृति...

425
00:29:47,496 --> 00:29:48,997
दर्ब-ए-इमाम दरगाहइस्फ़हान, ईरान

426
00:29:49,081 --> 00:29:51,708
...ईरान के इस्फ़हान मेंएक दरगाह में देखी जा सकती है।

427
00:29:52,167 --> 00:29:56,964
बिना इसमें अंतर्निहितगणितीय सिद्धांतों की जानकारी के,

428
00:29:57,047 --> 00:30:00,092
पाँच सौ साल से भी पहले के कारीगरों ने

429
00:30:00,175 --> 00:30:04,596
पाँचगुना समरूपता केअसंभव रेखागणित को हल कर लिया।

430
00:30:05,597 --> 00:30:06,807
यह लो, हो गया।

431
00:30:09,226 --> 00:30:10,352
अब, मैं आपको चेता दूँ...

432
00:30:10,435 --> 00:30:12,563
चेतावनी सही थी।

433
00:30:13,021 --> 00:30:16,733
हाँ, बेशक़, अब यह इतना जटिल है

434
00:30:16,817 --> 00:30:20,279
कि हम आपकोविस्तार से बताकर तंग नहीं करेंगे।

435
00:30:20,737 --> 00:30:22,239
केवल एक नमूना।

436
00:30:22,948 --> 00:30:27,911
तो, एक आइकोसहेड्रन के बजाय, हमारे पासआइकोसहेड्रा का आइकोसहेड्रन है।

437
00:30:28,495 --> 00:30:31,790
और हमने कहा, "ओह, शायद बाहर की ओरकुछ बनाते जाने का यह एक तरीका है

438
00:30:31,874 --> 00:30:33,375
जो इस संरचना को बरकरार रखेगा।"

439
00:30:34,042 --> 00:30:35,252
पर हमारे सामने समस्या आ गई।

440
00:30:35,961 --> 00:30:38,964
पर इस प्रतिरूप ने हमारी समस्या सुलझा दी।

441
00:30:39,047 --> 00:30:41,967
यह एक असली क्वाज़ीक्रिस्टल का प्रतीक है।

442
00:30:42,050 --> 00:30:44,052
...और आप केवल एक यह सतह बना...

443
00:30:44,136 --> 00:30:47,848
अब स्टाइनहार्ड्ट प्रकृति मेंएक क्वाज़ीक्रिस्टल ढूँढना चाहते थे।

444
00:30:50,225 --> 00:30:53,353
तो फिर आप कमचटका में फ़ील्डवर्क करने गए।

445
00:30:53,437 --> 00:30:55,606
उसकी प्रेरणा आपको ज़रूर यह सैद्धांतिक...

446
00:30:55,689 --> 00:30:57,524
हाँ। इस प्रतिरूप से प्रेरित होकर।

447
00:30:57,608 --> 00:30:58,901
क्योंकि यह प्रतिरूप यही बताता है:

448
00:30:58,984 --> 00:31:02,779
"दरअसल, अगर परमाणुओं के पास शक्तियाँ हैंजो इन इंटरलॉक की तरह हैं,

449
00:31:02,863 --> 00:31:05,324
उनके पास यह संरचनाबनाने के अलावा कोई चारा नहीं है।"

450
00:31:05,407 --> 00:31:06,950
इसने तुरंत मुझे सोचने पर मजबूर किया,

451
00:31:07,034 --> 00:31:11,413
क्या यह संभव है कि प्रकृति ने मनुष्य सेपहले क्वाज़ीक्रिस्टल बना दिया हो?"

452
00:31:11,496 --> 00:31:16,627
तो फिर शुरू हुई कई दशक लंबीप्राकृतिक क्वाज़ीक्रिस्टल की तलाश।

453
00:31:17,169 --> 00:31:20,297
आख़िरकार हमें फ़्लोरेंस में लूका बिन्डीनामक एक खनिज विज्ञानी मिला...

454
00:31:20,380 --> 00:31:21,882
लूका बिन्डीयूनीवर्सिटी ऑफ़ फ़्लोरेंस

455
00:31:21,965 --> 00:31:25,802
...जिसके पास उसके संग्रहालय मेंएक छोटा सा नमूना था...

456
00:31:26,303 --> 00:31:28,889
एक पत्थर, एक पेचीदा सा पत्थर,

457
00:31:28,972 --> 00:31:32,226
जिसके अंदर क्वाज़ीक्रिस्टल काएक छोटा कण था।

458
00:31:32,976 --> 00:31:35,229
उस नमूने की जाँच करके

459
00:31:35,312 --> 00:31:39,274
हमें कुछ संकेत मिले कि हमारे हाथ मेंकिसी उल्का-पिंड का एक टुकड़ा है।

460
00:31:39,358 --> 00:31:44,655
पर यह साबित करने के लिए हमें पता करना थाकि वह पत्थर आया कहाँ से था

461
00:31:44,738 --> 00:31:47,616
और कुछ और नमूने इकट्ठे करने की कोशिशकरनी थी ताकि साबित कर सकें।

462
00:31:48,158 --> 00:31:51,203
तो पॉल स्टाइनहार्ड्ट और लूका बिन्डी

463
00:31:51,286 --> 00:31:54,915
सुदूर पूर्वी रूस में,बेरिंग स्ट्रेट के पास

464
00:31:54,998 --> 00:31:56,959
एक अभियान लेकर निकल पड़े।

465
00:31:59,878 --> 00:32:04,091
लाल निशान उल्का-पिंड केटुकड़ों की जगह दिखाता है।

466
00:32:05,008 --> 00:32:09,763
वे लिस्टवेनीट्योवी नामकएक खाड़ी के पास मिले थे

467
00:32:10,180 --> 00:32:12,099
जिसके बारे में कभी किसी ने नहीं सुना।

468
00:32:13,141 --> 00:32:18,438
उस अभियान में पहलेरूसी भूविज्ञानी दल के सदस्य भी शामिल थे

469
00:32:18,522 --> 00:32:22,317
जिन्होंने कई दशक पहले पहला नमूना ढूँढा था।

470
00:32:36,874 --> 00:32:39,918
उन्हें अनजान भूभाग से गुज़रना पड़ा,

471
00:32:40,002 --> 00:32:42,921
जो पॉल स्टाइनहार्ड्ट के लिएबिल्कुल नया था,

472
00:32:43,005 --> 00:32:49,636
जो कभी प्रिंस्टन यूनीवर्सिटी केबगीचे से आगे कहीं बाहर नहीं गए थे।

473
00:33:00,397 --> 00:33:03,817
हज़ारों मच्छरों ने उनका जीना दूभर कर दिया।

474
00:33:04,318 --> 00:33:07,696
यहाँ हम उन्हें उनके चेहरे परएक मच्छरदानी के साथ देख रहे हैं।

475
00:33:08,280 --> 00:33:10,365
उनको ढंग से नींद नहीं आती थी।

476
00:33:10,782 --> 00:33:15,370
भालू केवल उनके सपनों में ही नहीं आते थे,वे वास्तव में वहाँ थे।

477
00:33:16,622 --> 00:33:20,584
उल्का-पिंड के टुकड़े ढूँढने के लिएउनकी कड़ी मेहनत रंग लाई।

478
00:33:21,710 --> 00:33:25,172
उनकी खोज की पहली जांच आशाजनक थी।

479
00:33:26,215 --> 00:33:30,344
अब बिन्डी और स्टाइनहार्ड्ट के पासख़ुशी मनाने का कारण था,

480
00:33:30,427 --> 00:33:35,307
हालांकि अभी उन्हें पता नहीं चल सकता थाकि उनमें क्वाज़ीक्रिस्टल हैं या नहीं।

481
00:33:37,351 --> 00:33:41,647
नए मिले नमूने की एक्स-रे विवर्तन आकृति में

482
00:33:41,730 --> 00:33:44,900
निषिद्ध पाँचगुना समरूपता दिखी,

483
00:33:44,983 --> 00:33:49,363
सबूत कि उल्का-पिंड के अंदरक्वाज़ीक्रिस्टल थे।

484
00:33:49,446 --> 00:33:52,199
क्या आप बता सकते हैं आपकोक्या महसूस हुआ जब आपने यह देखा?

485
00:33:52,950 --> 00:33:56,662
शायद सब कुछ... मेरे लिए उस क्षण मेंसमय जैसे रुक गया था।

486
00:33:58,247 --> 00:33:59,248
जैसे...

487
00:34:00,832 --> 00:34:04,336
इस प्रतिरूप को देखते हीमुझे तुरंत पता चल गया

488
00:34:04,419 --> 00:34:07,464
कि हम जो इतने दशकों सेप्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे

489
00:34:07,548 --> 00:34:09,424
अब प्राप्त कर लिया है।

490
00:34:09,507 --> 00:34:13,762
साथ ही, हमने प्रमाणित कर लिया थाकि यह क्वाज़ीक्रिस्टल

491
00:34:13,846 --> 00:34:17,516
ना केवल प्रकृति में बना थाबल्कि अंतरिक्ष में बना था।

492
00:34:17,599 --> 00:34:19,016
उल्का-पिंडों के अध्ययन का केन्द्र

493
00:34:19,101 --> 00:34:22,312
पदार्थ के गुप्त रहस्यों को छोड़ कर

494
00:34:22,771 --> 00:34:27,525
हम ज़्यादा साधारण पत्थरों की ओर बढ़ते हैंजो हमारे ऊपर गिर चुके हैं।

495
00:34:27,609 --> 00:34:30,070
...तो यहाँ हमने चिपकू पायदान रखे हैं।

496
00:34:31,905 --> 00:34:36,534
एरिज़ोना स्टेट यूनीवर्सिटी के पासबहुत बड़ा संग्रह है।

497
00:34:36,618 --> 00:34:39,329
बाहर की धूल-मिट्टीइस साफ़ तहखाने में जाएगी।

498
00:34:39,413 --> 00:34:40,539
लॉरेंस गार्वीएरिज़ोना स्टेट यूनीवर्सिटी

499
00:34:40,621 --> 00:34:42,666
पर शानदार कहानियाँहमारा इंतज़ार कर रही थीं।

500
00:34:42,748 --> 00:34:43,583
तो जब हम अंदर जाएँ,

501
00:34:43,667 --> 00:34:45,752
जूतों से मिट्टी निकालने के लिएइस पर पैर रख कर जाना।

502
00:34:45,835 --> 00:34:46,670
ठीक है।

503
00:34:46,753 --> 00:34:49,464
लॉरेंस गार्वी, वहाँ केअध्यक्ष ने हमें सब दिखाया।

504
00:34:49,547 --> 00:34:53,927
हमने यहाँ हवा का दबाव बनाकर रखा हैताकि साफ़ हवा अंदर आती रहे।

505
00:34:54,011 --> 00:34:55,637
-मिट्टी निकल गई? अच्छा है।-हाँ।

506
00:34:55,721 --> 00:34:59,308
और यहाँ कैमरे लगे हैं।कैमरे को देख कर मुस्कराओ, हाथ हिलाओ।

507
00:34:59,933 --> 00:35:02,519
पर सबसे महत्वपूर्ण यह है

508
00:35:02,603 --> 00:35:05,355
कि जब हम ऐसेउल्का-पिंडों के संस्थान में हों

509
00:35:05,439 --> 00:35:08,734
तो उल्का-पिंडों कोजितना संभव हो, साफ़ रखें।

510
00:35:08,817 --> 00:35:10,694
आमतौर पर, हम ख़ुद कोसाफ़ रखने की कोशिश करते हैं।

511
00:35:10,777 --> 00:35:13,822
यहाँ हम नमूनों से हमारी उँगलियों कीचिकनाहट दूर रखने की कोशिश करते हैं।

512
00:35:13,906 --> 00:35:16,700
तो आप दस्ताने पहन लीजिए,और मैं भी पहन लूँगा।

513
00:35:16,783 --> 00:35:18,660
और हम यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि मैं आपको

514
00:35:18,744 --> 00:35:23,123
एक शानदार उल्का-पिंड दिखाना चाहता हूँजो कुछ सप्ताह पहले ही गिरा है,

515
00:35:23,207 --> 00:35:24,875
और दरअसल, कोस्टा रिका पर गिरा था।

516
00:35:24,958 --> 00:35:28,962
और यह उल्का-पिंडकार्बनिक यौगिकों से भरा पड़ा है।

517
00:35:29,046 --> 00:35:30,464
और यह महत्वपूर्ण है।

518
00:35:30,547 --> 00:35:32,257
क्योंकि इससे हमेंहमारे प्रारंभिक सौर मंडल के

519
00:35:32,341 --> 00:35:35,636
और शायद यहाँ परजीवन की उत्पत्ति के बारे में भी पता चलेगा।

520
00:35:35,719 --> 00:35:39,223
अब, मैंने नमूनों को यहाँविशेष अलमारियों में रखा हुआ है।

521
00:35:39,306 --> 00:35:40,849
यह नाइट्रोजन अलमारियाँ हैं।

522
00:35:40,933 --> 00:35:43,018
ठीक है? तो हमारे पासनाइट्रोजन है... ड्राइ नाइट्रोजन।

523
00:35:43,101 --> 00:35:46,605
महत्वपूर्ण बात यह है: अलमारियों मेंड्राइ नाइट्रोजन लगातार डाली जा रही है।

524
00:35:46,688 --> 00:35:51,401
तो जब मैं इसे खोलूँगा तो आपकोनाइट्रोजन डलने की आवाज़ सुनाई देगी।

525
00:35:51,485 --> 00:35:53,612
और यह उल्का-पिंड अब संरक्षित हैं।

526
00:35:53,695 --> 00:35:56,740
उन पर पानी नहीं जा रहा।उन पर ऑक्सीजन नहीं जा रही।

527
00:35:56,823 --> 00:35:59,660
तो उन्हें संरक्षित रखने काफिलहाल यह सबसे उत्तम तरीका है।

528
00:35:59,743 --> 00:36:00,994
तो वह है यह सिसकारी?

529
00:36:01,078 --> 00:36:02,329
वह है यह सिसकारी।

530
00:36:03,372 --> 00:36:06,458
तो, उदाहरण स्वरूप, यह है...

531
00:36:08,502 --> 00:36:11,380
एक बहुत अद्भुत उल्का-पिंड।

532
00:36:12,089 --> 00:36:13,674
यह लो, देखा इसका नाम क्या है?

533
00:36:14,216 --> 00:36:15,551
"द डॉगहाउस।"

534
00:36:16,802 --> 00:36:17,803
तो फिर...

535
00:36:21,807 --> 00:36:23,100
तो...

536
00:36:23,183 --> 00:36:24,977
कहना पड़ेगा, इसे गिराना मत।

537
00:36:25,060 --> 00:36:27,646
-कोशिश करूँगा। ठीक है।-कृपया इसे गिराना मत।

538
00:36:30,858 --> 00:36:35,988
तो यह पत्थर कुछ ही सप्ताह पहलेकोस्टा रिका में गिरा है।

539
00:36:36,071 --> 00:36:37,781
और यह वालावास्तव में एक कुत्ता-घर में गिरा

540
00:36:37,865 --> 00:36:39,908
जब कुत्ता उसमें सो रहा था।

541
00:36:39,992 --> 00:36:43,287
-आशा है कुत्ते को चोट नहीं लगी।-उससे कुछ ही मिलीमीटर दूर गिरा

542
00:36:43,370 --> 00:36:46,373
और कुत्ते के पास ही ज़मीन में धँस गया।

543
00:36:46,999 --> 00:36:49,168
तो यह विशेष इसलिए भी है

544
00:36:49,251 --> 00:36:51,170
क्योंकि इसमें कुत्ते के कुछ बालअभी भी चिपके हुए हैं।

545
00:36:51,253 --> 00:36:52,379
सच में!

546
00:36:52,462 --> 00:36:55,174
और एक चीज़ जो इसे अद्भुत बनाती है,

547
00:36:55,257 --> 00:36:57,759
वह यह है कि अगर तुम इसे सूँघो...

548
00:36:59,094 --> 00:37:02,890
तो तुम्हें वास्तव में उनकार्बनिक यौगिकों की गंध आएगी जो इसमें हैं।

549
00:37:02,973 --> 00:37:06,476
ये 450 करोड़ साल पुराने यौगिक हैं

550
00:37:06,560 --> 00:37:09,313
जो किसी शुरू के ग्रह पर बने थे...

551
00:37:09,396 --> 00:37:11,440
वह ग्रह अब समाप्त हो चुका है...

552
00:37:11,523 --> 00:37:13,275
और इस पत्थर में कैद हो गए

553
00:37:13,358 --> 00:37:17,446
और 400 करोड़ साल तकक्षुद्रग्रह घेरे में बैठे रहे

554
00:37:17,529 --> 00:37:19,865
और फिर, किसी कारण से,यह क्षुद्रग्रह घेरे से निकल कर

555
00:37:19,948 --> 00:37:21,325
कोस्टा रिका में आ गिरा

556
00:37:21,408 --> 00:37:23,952
और अब यहाँ हमारेउल्का-पिंड के तहखाने में है।

557
00:37:24,036 --> 00:37:26,163
यह गंध कैसी है? यह जैसे कोई...

558
00:37:26,246 --> 00:37:28,624
हमें ठीक तरह पता नहींपर हमें लगता है यह चीज़...

559
00:37:28,707 --> 00:37:31,126
यह नेफ़थलीन जैसा है। वैसा ही कुछ है।

560
00:37:31,210 --> 00:37:33,045
उसी यौगिक जैसा कुछ है।

561
00:37:33,128 --> 00:37:34,880
किसी विलायक द्रव जैसा कुछ?

562
00:37:34,963 --> 00:37:36,632
हाँ, कुछ-कुछ।

563
00:37:36,715 --> 00:37:38,800
मैं इसे वापस रख देता हूँ,आपको फिर से ना उठाना हो तो।

564
00:37:38,884 --> 00:37:40,177
-नहीं, मैं...-वैसे,

565
00:37:40,260 --> 00:37:42,387
यह लाल रंग कुत्ता-घर की छत से है।

566
00:37:43,430 --> 00:37:46,892
और सफ़ेद कुत्ता-घर की ज़मीन से है।

567
00:37:46,975 --> 00:37:49,019
और क्या कुत्ते को तुरंत समझ आया

568
00:37:49,102 --> 00:37:51,688
कि उसके पास आसमान से कोई मेहमान आया है?

569
00:37:51,772 --> 00:37:54,399
उसे नहीं पता चला पर मज़े की बात यह है

570
00:37:54,483 --> 00:37:58,946
कि गंध के कारण लोगों ने उल्का-पिंडढूँढने के लिए कुत्तों का इस्तेमाल किया है।

571
00:37:59,029 --> 00:38:01,114
उन्हें यह गंध ढूँढने के लिएप्रशिक्षित किया जा सकता है।

572
00:38:02,074 --> 00:38:03,242
इसे अब वापस रख देते हैं।

573
00:38:09,665 --> 00:38:12,501
यह जिकीपिल्को क्षेत्र से टोलूका लौह है।

574
00:38:12,584 --> 00:38:13,585
यह लो, इसे उठा कर देखो।

575
00:38:13,669 --> 00:38:15,629
इसे अपने पैर पर मत गिराना। वह टूट जाएगा।

576
00:38:15,712 --> 00:38:16,713
अरे, बाप रे।

577
00:38:16,797 --> 00:38:18,882
तो, इसका वज़न होगा, क़रीब,

578
00:38:18,966 --> 00:38:22,219
पता नहीं, 30 किलो, 40 किलो,केवल इस एक पत्थर का।

579
00:38:22,302 --> 00:38:23,595
यह खरा कच्चा लोहा है?

580
00:38:23,679 --> 00:38:25,556
यह खरा लोहा है पर निकल मिला हुआ लोहा।

581
00:38:25,639 --> 00:38:28,225
-लाओ, गिर ना जाए। तैयार।-मैं आपको दे देता हूँ।

582
00:38:29,643 --> 00:38:33,313
टकराव से होने वाली एक बहुत अद्भुत घटनाजो कभी टीवी पर देखने को नहीं मिलती,

583
00:38:33,397 --> 00:38:35,691
वह है यह पदार्थ, टेक्टाइट्स।

584
00:38:35,774 --> 00:38:40,445
अब, यहाँ हमारे पास है...पृथ्वी पर कुछ प्रहार हुआ

585
00:38:40,529 --> 00:38:44,449
जिससे पृथ्वी की सतह काबहुत बड़ा हिस्सा पिघल गया।

586
00:38:44,533 --> 00:38:47,786
इस मामले में,शायद कई हज़ार वर्ग किलोमीटर धरती।

587
00:38:47,870 --> 00:38:50,455
वह शायद उसी क्षण पिघल गई होगी।

588
00:38:50,539 --> 00:38:52,291
और फिर उस टकराव के झटके से

589
00:38:52,374 --> 00:38:55,669
पृथ्वी के लगभग एक-तिहाई हिस्से परयह पदार्थ छिटक कर बिखर गया होगा।

590
00:38:55,752 --> 00:38:56,753
यह कब हुआ?

591
00:38:56,837 --> 00:38:59,590
हमें लगता है शायद... हमने इसकासमय 750,000 साल पहले का लगाया है।

592
00:38:59,673 --> 00:39:01,675
तो, सुनने में बहुत लंबा समय लगता है

593
00:39:01,758 --> 00:39:04,511
पर भूवैज्ञानिक समय अवधि की दृष्टि से,यह कल ही की बात है।

594
00:39:04,595 --> 00:39:06,680
-यह घटना हाल ही में हुई है।-यह काँच है?

595
00:39:06,763 --> 00:39:09,266
यह बस... तो यह है यहाँ... अगर आप सुनो...

596
00:39:10,434 --> 00:39:13,562
यह काँच है पर यहपृथ्वी से बाहर का काँच नहीं है।

597
00:39:13,645 --> 00:39:18,317
यह पृथ्वी का ही हैजिसका यह सारा हिस्सा पिघल गया था,

598
00:39:18,400 --> 00:39:22,613
वह पिघल कर सारी धरती पर छिड़का गया।

599
00:39:22,696 --> 00:39:26,450
तो आपको यह चीज़ेंदक्षिणपूर्वी एशिया, फ़िलीपींस,

600
00:39:26,533 --> 00:39:29,244
इन्डोनेशिया से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक

601
00:39:29,328 --> 00:39:31,496
और फिर नीचे अंटार्कटिका में भी मिलेंगी।

602
00:39:31,580 --> 00:39:34,333
तो यह बहुत बड़ी घटना थी।

603
00:39:34,416 --> 00:39:37,211
पर इनकी आकृतियों को देखो।पता है यह आकृतियाँ हमें क्या बता रही हैं?

604
00:39:37,294 --> 00:39:41,965
यह हमें बता रही हैं कि यह पदार्थछिड़का गया और फिर हवा में ही जम गया।

605
00:39:43,133 --> 00:39:45,260
अगर हम लोग यहाँ होते जब यह यहाँ गिरा था

606
00:39:45,344 --> 00:39:46,887
तो हम लोग ख़त्म हो जाते?

607
00:39:46,970 --> 00:39:48,180
सब कुछ, पूरी तरह।

608
00:39:48,263 --> 00:39:50,974
कल्पना करो... कई हज़ार वर्ग किलोमीटर...

609
00:39:51,058 --> 00:39:54,937
उसके नीचे सब कुछ लगभग तत्काल हीकाँच में परिवर्तित हो गया।

610
00:39:55,312 --> 00:39:57,689
तो, हाँ। आप वहाँ बैठकर चाय पी रहे होते,

611
00:39:57,773 --> 00:39:59,942
और आप काँच में बदल जाते। सब कुछ।

612
00:40:04,863 --> 00:40:08,742
बाह्य अँधेरी दुनिया से आने वालेहर पत्थर की

613
00:40:08,825 --> 00:40:10,327
अपनी कहानी है।

614
00:40:21,672 --> 00:40:26,635
इतिहास के हर समय में, उल्का-पिंडों नेमनुष्य की सोच को आकर्षित किया है।

615
00:40:27,427 --> 00:40:30,639
एक मोबाइल की रोशनी जितना साधारण उपकरण भी

616
00:40:30,722 --> 00:40:35,602
कहीं दूर से आए इन यात्रियों कीरहस्यमयी सुंदरता का गुणगान करता है।

617
00:41:04,381 --> 00:41:05,799
यहाँ हमारे पास...

618
00:41:05,883 --> 00:41:10,596
टैम्पी, एरिज़ोना मेंउसी उल्का-पिंडों के अध्ययन के केन्द्र में

619
00:41:10,679 --> 00:41:13,307
हम डॉ. मीनाक्षी वाधवा से मिले,

620
00:41:13,390 --> 00:41:16,852
जो उल्का-पिंडों केसर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों में से हैं।

621
00:41:16,935 --> 00:41:19,062
...40,000 अलग-अलग उल्का-पिंड हैं।

622
00:41:19,146 --> 00:41:20,480
मीनाक्षी वाधवाभूमंडलीय वैज्ञानिक

623
00:41:20,564 --> 00:41:23,567
-जिसमें बारबरा हेपवर्थ की एक कृति भी है।-हाँ। बिल्कुल।

624
00:41:24,943 --> 00:41:28,363
हाँ और हम यहाँ जो भी काम करते हैं,ये उसका एक बहुत बढ़िया स्रोत हैं।

625
00:41:28,447 --> 00:41:29,698
दूसरी दुनिया के दूत

626
00:41:29,781 --> 00:41:31,783
यह क्या है?

627
00:41:31,867 --> 00:41:34,953
तो वह गोल चीज़ जो आप देख रहे हो,

628
00:41:35,037 --> 00:41:37,664
यह एक छोटा सा...

629
00:41:37,748 --> 00:41:40,334
आप सोच लीजिए यह एक छोटी सी बूँद है

630
00:41:40,417 --> 00:41:43,420
जो सौर मंडल कीएकदम शुरुआत के समय मौजूद थी,

631
00:41:43,504 --> 00:41:46,381
लगभग 450 करोड़ साल पहले।

632
00:41:46,465 --> 00:41:48,258
क्या यह ग्रहों के बनने से पहले था?

633
00:41:48,342 --> 00:41:51,929
हाँ। यह तब था जब केवल गैस और धूल थी।

634
00:41:52,012 --> 00:41:54,890
और कुछ नहीं था। कोई ग्रह नहीं थे,ना ही पृथ्वी थी। कुछ नहीं था।

635
00:41:55,474 --> 00:41:57,059
और यह हैं...

636
00:41:57,142 --> 00:42:00,896
इन्हें अग्नि वर्षा की बूँदें कहा गया है

637
00:42:00,979 --> 00:42:04,233
जो... उस निहारिका में से,उस गैस और धूल के बादल से

638
00:42:04,316 --> 00:42:06,443
निकल कर अभी जम ही रही थीं।

639
00:42:06,527 --> 00:42:09,530
शायद किसी किस्म कीआकस्मिक प्रक्रिया के कारण

640
00:42:09,613 --> 00:42:12,491
जो हमारे सौर मंडल के सबसे शुरू केइतिहास में हो रही थीं।

641
00:42:12,574 --> 00:42:15,702
और दरअसल, हमें नहीं पतावह झटके कहाँ से लग रहे थे,

642
00:42:15,786 --> 00:42:18,205
पर हमें लगता है वैसी ही कुछ प्रक्रियाएँ

643
00:42:18,288 --> 00:42:20,958
उन अन्य सौर मंडलों में हो रही हैंजो आजकल बन रहे हैं।

644
00:42:21,583 --> 00:42:23,460
और इसके अंदर कौन से तत्व मौजूद हैं?

645
00:42:23,544 --> 00:42:25,963
हाँ, तो जो आप देख रहे हैं,

646
00:42:26,046 --> 00:42:29,591
यह जिस तरह की सुंदररंगीन काँच जैसी आकृति आप देख रहे हैं?

647
00:42:29,675 --> 00:42:32,052
यह ऑलिवीन नामक खनिज पदार्थ है।

648
00:42:32,636 --> 00:42:36,932
और इस तरह का...जब मैं इसे घुमाती हूँ इसमें...

649
00:42:37,015 --> 00:42:40,561
जब यह इस तरह की प्रेषित रोशनीइन खनिज पदार्थों में से गुज़रती है,

650
00:42:40,644 --> 00:42:43,397
आप तरंगित... रोशनी तरंगित होती है,

651
00:42:43,480 --> 00:42:45,148
तो उससे खनिज पदार्थ ख़ुद ही

652
00:42:45,232 --> 00:42:48,235
कुछ दिशाओं में रोशनी को नष्ट कर रहा है।

653
00:42:48,318 --> 00:42:53,115
तो इसलिए आपको पहले यह चमकऔर फिर अंधेरा सा दिख रहा है।

654
00:42:53,740 --> 00:42:56,994
यह एक सुंदररंगीन काँच वाली खिड़की की तरह है।

655
00:42:57,077 --> 00:43:00,247
-मुझे लगता है यह कुछ... हाँ।-यह बहुत सुंदर है।

656
00:43:00,330 --> 00:43:02,833
यह एक टुकड़ा है,

657
00:43:02,916 --> 00:43:08,547
एक पतला टुकड़ा, मंगल ग्रह के उस नमूने काजो मैंने सबसे पहले देखा था

658
00:43:08,630 --> 00:43:11,967
जब उल्का-पिंडों के अध्ययन कामेरा कैरियर शुरू ही हुआ था।

659
00:43:12,050 --> 00:43:15,679
और मैं तो मंत्र-मुग्ध हो गई थी क्योंकि,

660
00:43:15,762 --> 00:43:18,682
यह इतना जाना-पहचाना लगता हैपर आया किसी दूसरी दुनिया से है।

661
00:43:19,474 --> 00:43:23,687
हम जानते हैं यह पत्थर मंगल ग्रह से हैक्योंकि इसमें जो गैसें कैद हैं

662
00:43:23,770 --> 00:43:27,399
उनकी संरचना बिल्कुल वही हैजैसी मंगल ग्रह के वायुमंडल की है।

663
00:43:27,482 --> 00:43:30,277
तो जब आप इस पत्थर काएक टुकड़ा लेकर उसे गरम करते हो,

664
00:43:30,360 --> 00:43:34,448
यह गैसें रिहा हो जाती हैं, और तुमउस गैस की संरचना माप सकते हो,

665
00:43:34,531 --> 00:43:36,992
और यह बिल्कुल वैसी संरचना है

666
00:43:37,534 --> 00:43:40,621
जैसी हमने अंतरिक्षयान का इस्तेमाल करकेमंगल ग्रह पर मापी है।

667
00:43:40,704 --> 00:43:43,081
-अद्भुत।-हाँ, अद्भुत है।

668
00:44:06,688 --> 00:44:10,108
तो क्या कार्ल सेगन सही थे,कि हम तारों की धूल से बने हैं?

669
00:44:10,192 --> 00:44:11,860
हम तारों की धूल ही हैं, बिल्कुल।

670
00:44:11,944 --> 00:44:16,031
हमारे शरीर के हर तत्व का

671
00:44:16,114 --> 00:44:20,744
यहाँ आने से पहलेदूसरे तारों में संश्लेषण हुआ था।

672
00:44:20,827 --> 00:44:22,704
तो हाँ, हम सब तारों की धूल हैं।

673
00:44:23,872 --> 00:44:26,124
-अंत में।-क्या शानदार विचार है।

674
00:44:26,208 --> 00:44:27,042
हाँ।

675
00:44:27,125 --> 00:44:31,088
इस पूरी फ़िल्म की शूटिंग के समयकेवल यही एक समय ऐसा था

676
00:44:31,171 --> 00:44:33,423
जब मैं ख़ुद को रोक नहीं पाया।

677
00:44:33,507 --> 00:44:36,468
कैमरे के पीछे से मुझे दख़ल देना ही था।

678
00:44:37,010 --> 00:44:40,222
मुझे नहीं लगता मैं तारों की धूल हूँ।मैं बावेरियन हूँ।

679
00:44:44,685 --> 00:44:47,187
हाँ,वह तो किसी ख़ास चीज़ से बने हैं, वाक़ई।

680
00:44:47,813 --> 00:44:49,857
हाँ। सही है।

681
00:44:58,782 --> 00:45:00,367
हमारी यात्रा हमें

682
00:45:00,450 --> 00:45:03,161
हर उस जगह लेकर गई जहाँ भीपृथ्वी पर बड़े आग के गोले गिरे हैं।

683
00:45:03,245 --> 00:45:04,580
रामगढ़ क्रेटरराजस्थान, भारत

684
00:45:05,372 --> 00:45:09,293
हम जानना चाहते थेकि क्या जीवन बाह्य अंतरिक्ष से आया है।

685
00:45:10,252 --> 00:45:16,425
यह उत्तरी भारत के राजस्थान में रामगढ़क्रेटर है, चार किलोमीटर व्यास के साथ।

686
00:45:17,259 --> 00:45:20,262
अंतरिक्ष से, यह तुरंत नज़र आता है,

687
00:45:20,345 --> 00:45:24,850
पर नीचे धरती पर, आपको पता भी नहीं चलताआप एक गड्ढे के अंदर हो।

688
00:45:25,392 --> 00:45:30,230
हालाँकि, 10वीं सदी से यहाँहिन्दू मंदिर बनाए जाते रहे।

689
00:45:32,482 --> 00:45:36,403
हम जानना चाहते थे कि क्या उल्का-पिंडों मेंमिलने वाले कार्बनिक पदार्थ से

690
00:45:36,486 --> 00:45:41,033
हमारे ग्रह पर जीवन के अंश आए हो सकते हैं।

691
00:45:42,367 --> 00:45:46,788
हम प्रोफेसर नीता सहाय कीविशेषज्ञता से जानकारी ले रहे थे

692
00:45:46,872 --> 00:45:51,001
जो रसायन-शास्त्र से जीव-विज्ञान केपरिवर्तन का अध्ययन करती हैं।

693
00:45:52,127 --> 00:45:56,173
और हम यहाँ इस...इस विशाल गड्ढे में हैं,

694
00:45:56,256 --> 00:45:58,175
जो उल्का-पिंड के प्रहार से बना है।

695
00:45:58,258 --> 00:46:00,802
और हमें नहीं पतावह कार्बन से युक्त था या नहीं

696
00:46:00,886 --> 00:46:03,722
पर हमें यह पता हैकि कार्बन से युक्त उल्का-पिंडों में

697
00:46:03,805 --> 00:46:06,308
विभिन्न प्रकार के कार्बनिक अणु होते हैं।

698
00:46:06,391 --> 00:46:10,562
इनमें से महत्वपूर्ण कौन से हैं जोजीवन के रचक खंडों का प्रतीक हो सकते हैं?

699
00:46:10,646 --> 00:46:13,941
दरअसल, उल्का-पिंडों मेंजीवन के सभी रचक खंड पाए गए हैं।

700
00:46:14,024 --> 00:46:15,442
नीता सहायभू-रसायनज्ञ

701
00:46:15,526 --> 00:46:17,069
एमिनो एसिड जिनसे प्रोटीन बनते हैं,

702
00:46:17,152 --> 00:46:20,072
लिपिड अणुजिनसे कोशिका झिल्ली बनती है

703
00:46:20,155 --> 00:46:23,075
और यहाँ तक की राइबोज़ भी,जो एक शर्करा है।

704
00:46:23,158 --> 00:46:25,577
मुझे बहुत आश्चर्यजनक लगता है

705
00:46:25,661 --> 00:46:30,332
कि शर्करा आदि चीज़ें जिनसे प्रोटीनबनते हैं, उल्का-पिंडों में मिलती हैं।

706
00:46:30,415 --> 00:46:31,250
हाँ।

707
00:46:31,333 --> 00:46:35,170
क्या वे भूवैज्ञानिक तरीके से बनते हैं,जैसे खनिज, या...

708
00:46:35,754 --> 00:46:39,341
वे खनिजों की तरह नहीं हैंचूँकि वे कार्बनिक अणु होते हैं

709
00:46:39,424 --> 00:46:40,759
और खनिज अकार्बनिक होते हैं,

710
00:46:40,843 --> 00:46:42,970
पर माना जाता है कि उनका निर्माण

711
00:46:43,053 --> 00:46:46,974
कार्बनिक अणुओं का खनिजों की सतह सेपरस्पर क्रिया से हुआ है।

712
00:46:47,057 --> 00:46:50,727
उदाहरण स्वरूप, अंतर्तारकीय कणों में,

713
00:46:50,811 --> 00:46:53,772
और साथ ही उल्का-पिंडों की सतहों पर भी।

714
00:46:54,356 --> 00:46:56,650
पर फिर भी, इन अंशों और जीवन शुरू होने की

715
00:46:56,733 --> 00:47:00,445
प्रक्रिया के बीचबहुत महत्वपूर्ण चरण शेष होंगे।

716
00:47:00,529 --> 00:47:02,322
-ठीक।-हमें किस चीज़ की ज़रूरत होगी?

717
00:47:02,406 --> 00:47:04,992
हमें यह सब डालने के लिएशायद किसी प्रकार के पात्र

718
00:47:05,075 --> 00:47:06,785
और उष्मा के स्रोत की ज़रूरत होगी?

719
00:47:06,869 --> 00:47:10,205
हाँ। तो इन साधारण रचक खंडों का

720
00:47:10,289 --> 00:47:12,541
बहुलीकरण करके लंबी चेनें बननी होंगी

721
00:47:12,624 --> 00:47:17,546
क्योंकि लंबी चेनों में दोहरा होनेऔर काम आने लायक क्षमता होती है।

722
00:47:17,629 --> 00:47:19,631
आपका पैन्स्पर्मिया सिद्धांत के बारे मेंक्या विचार है,

723
00:47:19,715 --> 00:47:23,302
जिसके अनुसार जीवन इस ब्रह्माण्ड मेंचारों ओर फैला हुआ है?

724
00:47:23,385 --> 00:47:26,054
मेरा मतलब, क्या यह संभव हैकि सजीव सूक्ष्म जीव

725
00:47:26,138 --> 00:47:29,975
बाह्य अंतरिक्ष के प्रचंड तापमानऔर विकिरण को सहन कर सकते हैं?

726
00:47:30,517 --> 00:47:33,353
डीएनए, दरअसल, काफ़ी मज़बूत होता है।

727
00:47:33,437 --> 00:47:37,524
और अंतरिक्ष में जीवित रह पाना संभव है।

728
00:47:37,983 --> 00:47:42,696
और एक पूरा सूक्ष्म जीव भीशायद बीजाणु जैसे रूप में जीवित रह जाए।

729
00:47:42,779 --> 00:47:46,450
क्योंकि लोगों नेपृथ्वी में गहराई तक खुदाई की है

730
00:47:46,533 --> 00:47:50,120
और कुछ किलोमीटर नीचे तक भी

731
00:47:50,204 --> 00:47:54,791
बैक्टीरिया मिले हैं जो, माना जाता है,वहाँ सैंकड़ों सालों से रह रहे हैं।

732
00:47:54,875 --> 00:47:59,505
और वे निलंबित प्राणवत्ता कीस्थिति में जीवित रहते हैं।

733
00:47:59,588 --> 00:48:02,841
क्या आपको कुछ पता हैकि पुजारियों ने यहाँ मंदिर क्यों बनाए हैं?

734
00:48:02,925 --> 00:48:05,302
और यह वाला तो शिव को समर्पित है ना?

735
00:48:05,385 --> 00:48:09,765
मतलब, यह संयोग तो नहीं होगा, उल्का-पिंड केप्रहार से बने गड्ढे की धरती पर।

736
00:48:09,848 --> 00:48:14,394
यह दिलचस्प हैकि यह मंदिर शिव और पार्वती का है।

737
00:48:14,478 --> 00:48:19,900
और यह एक तांत्रिक मंदिर हैजो सृष्टि का प्रतीक है।

738
00:48:19,983 --> 00:48:22,110
और शिव विनाश के भी देवता हैं।

739
00:48:22,569 --> 00:48:25,072
तो, हिन्दू धर्म मेंब्रह्माण्ड के सृजन और विनाश के

740
00:48:25,155 --> 00:48:28,784
अनवरत चक्रों की मान्यता है।

741
00:48:28,867 --> 00:48:32,704
और, यह उपयुक्त है कि यह उल्का-पिंड केप्रहार से बने गड्ढे वाली जगह पर है,

742
00:48:32,788 --> 00:48:36,124
जहाँ प्रहार से जीवन नष्ट हो सकता है

743
00:48:36,208 --> 00:48:38,794
पर फिर वही वो कार्बनिक अणु भी लाएगा

744
00:48:38,877 --> 00:48:41,129
जिनसे जीवन की शुरुआत हुई हो सकती है।

745
00:48:45,592 --> 00:48:50,180
यही चीज़ वहाँ रहने वाले एक साधु ने भी कही।

746
00:48:51,014 --> 00:48:56,645
अगर किसी युद्ध या उल्का-पिंड से मानवताऔर सारा जीवन समाप्त हो जाएगा,

747
00:48:56,728 --> 00:49:01,108
तो यहाँ, इस गड्ढे की झील में,जीवन पुनः शुरू होगा।

748
00:49:10,450 --> 00:49:14,663
हमें वहाँ जाना थाजहाँ एक बहुत बड़ा आग का गोला गिरा था।

749
00:49:15,622 --> 00:49:19,084
वह मेक्सिको के यूकाटन प्रायद्वीप के तट पर

750
00:49:19,168 --> 00:49:21,795
एक ऐसी जगह थाजिसका नाम बोलना बहुत कठिन है।

751
00:49:21,879 --> 00:49:24,798
चिकक्षुलुब पोर्टोमेक्सिको

752
00:49:24,882 --> 00:49:30,804
यह वही जगह है जहाँ हमारे ग्रह कोएक अकल्पनीय कयामत सहनी पड़ी थी।

753
00:49:31,597 --> 00:49:34,850
अंतरिक्ष से जो यहाँ गिरा

754
00:49:34,933 --> 00:49:40,105
उसमें हिरोशिमा के परमाणु बमों सेकई सौ लाख गुना...

755
00:49:40,189 --> 00:49:43,066
शायद कई हज़ार लाख गुना ज़्यादा शक्ति थी।

756
00:49:44,610 --> 00:49:47,571
यहाँ की कोई चीज़ उसकी याद नहीं दिलाती।

757
00:49:48,113 --> 00:49:51,992
जीवन के हर पहलू परजैसे एक भारी बोरियत छाई हुई है।

758
00:49:54,203 --> 00:50:00,292
चिकक्षुलुब एक ऐसा उजाड़बीच रिज़ॉर्ट है कि रोने का मन करता है।

759
00:51:12,489 --> 00:51:15,826
यहाँ के कुत्ते,इस ग्रह के बाकी सभी कुत्तों की तरह

760
00:51:15,909 --> 00:51:19,121
यह समझने के लिए बहुत मूर्ख हैं

761
00:51:19,204 --> 00:51:22,708
कि ठीक इसी जगह पर हुई घटना से

762
00:51:22,791 --> 00:51:25,627
संसार की तीन-चौथाई प्रजातियाँसमाप्त हो गईं थीं।

763
00:51:31,550 --> 00:51:35,304
डायनोसॉर केवलस्थानीय संग्रहालयों में ही बचे हैं।

764
00:51:38,265 --> 00:51:42,477
उनकी आँखें मनुष्यों द्वारा बनाई गईं हैं।वे कुछ नहीं देख सकते।

765
00:51:44,062 --> 00:51:46,690
केवल उनके कदमों के निशान असली हैं,

766
00:51:46,773 --> 00:51:50,527
पर वे दिखाते हैं वे टहल रहे थे,भाग नहीं रहे थे।

767
00:51:51,612 --> 00:51:54,781
वे हर चीज़ केअचानक समाप्त होने से बेख़बर थे।

768
00:52:13,550 --> 00:52:15,928
यह सूनी जगह पृथ्वी के इतिहास की

769
00:52:16,011 --> 00:52:19,681
सबसे बड़ी भूगर्भीय आपदाओं में सेएक के मध्य में है।

770
00:52:20,182 --> 00:52:24,436
इसने ग्रह पर जीवन की दिशाअपरिवर्तनीय ढंग से बदल दी।

771
00:52:24,520 --> 00:52:26,605
क़रीब 66 मिलियन साल पहले,

772
00:52:26,688 --> 00:52:29,066
एक क्षुद्रग्रह, शायद 10 किलोमीटर व्यास का,

773
00:52:29,149 --> 00:52:34,029
बीस किलोमीटर प्रति सेकंड की गति सेपृथ्वी की ओर धड़धड़ाता हुआ आया।

774
00:52:34,905 --> 00:52:37,574
उसका प्रहार इतना ज़ोरदार था

775
00:52:37,658 --> 00:52:41,495
कि उसने एक 30 किलोमीटर गहरा गड्ढा कर दिया।

776
00:52:42,246 --> 00:52:44,373
उससे जो गड्ढा बना...

777
00:52:44,456 --> 00:52:49,670
वह 100 किलोमीटर समुद्र की ओरऔर 100 किलोमीटर अंदर की ओर फैला हुआ है,

778
00:52:50,212 --> 00:52:54,508
और उस प्रहार सेपृथ्वी की सतह में पैदा हुए तापमान से

779
00:52:54,591 --> 00:52:59,805
वह सतह और उल्का स्वयं भी पिघल करभाप बन कर उड़ गए।

780
00:53:00,597 --> 00:53:03,308
उस समय 11 तीव्रता वाले भूकंप आए।

781
00:53:03,392 --> 00:53:07,938
यह किसी भीऐतिहासिक भूकंप से 100 गुना ज़्यादा है।

782
00:53:08,021 --> 00:53:10,691
ज़बरदस्त सूनामी, 100 मीटर ऊँची लहरों ने

783
00:53:10,774 --> 00:53:14,152
दूर-दराज़ के समुद्रों के तटों काविनाश कर डाला

784
00:53:14,236 --> 00:53:19,658
और धूल-मिट्टी, पिघली बूँदोंऔर गैसों का एक विशाल बादल

785
00:53:19,741 --> 00:53:21,285
वायुमंडल में ऊँचा उठा,

786
00:53:21,368 --> 00:53:25,998
कुछ वस्तुएँ तो पलायन वेग तक भी पहुँच गईंऔर बाहर अंतरिक्ष में निकल गईं।

787
00:53:26,665 --> 00:53:31,044
वे पिघली हुई बूँदें 3000 किलोमीटर केक्षेत्र में बारिश बन कर बरसीं,

788
00:53:31,128 --> 00:53:34,214
और धरती पर आग के तूफ़ानों को जन्म दिया।

789
00:53:34,298 --> 00:53:36,717
मुझे बहुत पसंद हैजैसे फ़िल्मों में यह दिखाते हैं।

790
00:53:36,800 --> 00:53:37,926
लास्ट डे ऑफ़ द डायनॉसोर्स

791
00:53:38,010 --> 00:53:40,012
प्रहार के स्थान से 800 किमी दूर

792
00:53:40,095 --> 00:53:41,805
इतनी तेज़ रोशनी है

793
00:53:41,889 --> 00:53:45,142
कि अलामोसॉरस का बदनपारदर्शी प्रतीत हो रहा है...

794
00:53:47,811 --> 00:53:50,981
...और उनकी परछाईयों के बिंबपृथ्वी पर छप रहे हैं।

795
00:53:54,568 --> 00:53:57,154
झुलसाने वाली रोशनी नेउनकी आँखों की पुतलियों को जला डाला।

796
00:53:57,237 --> 00:53:59,740
अब उन्हें नज़र नहीं आ रहाउनकी ओर क्या आ रहा है।

797
00:54:00,741 --> 00:54:02,117
पर उन्हें महसूस हो रहा है।

798
00:54:04,703 --> 00:54:06,622
स्तनधारी जानवर, वे जीवित बच गए,

799
00:54:06,705 --> 00:54:10,125
और उन्होंने नएपर्यावरणीय अवसरों का लाभ उठाया।

800
00:54:11,376 --> 00:54:14,796
हम लोग ख़ुद, होमो सेपियन्स की प्रजाति, भीशायद यहाँ नहीं होते

801
00:54:14,880 --> 00:54:17,382
अगर यह ज़ोरदार प्रहार नहीं हुआ होता।

802
00:54:18,967 --> 00:54:23,889
सत्तर के दशक तक किसी कोनहीं पता था यहाँ प्रहार से बना गड्ढा है।

803
00:54:24,431 --> 00:54:30,896
गुरुत्वाकर्षण असंगति और बोर होल के डेटा सेउसके आकार और नाप का पता चला।

804
00:54:30,979 --> 00:54:31,980
चिकक्षुलुब पोर्टोमेरीदा

805
00:54:32,064 --> 00:54:33,941
उसके होने का सतह पर एक ही सबूत है,

806
00:54:34,024 --> 00:54:38,654
सिनॉटेस नामक पानी के तालों काएक रहस्यमयी घेरा।

807
00:54:39,363 --> 00:54:42,449
वे उस प्रहार की भूगर्भीय गूँज हैं।

808
00:54:43,617 --> 00:54:47,454
चूँकि यूकाटन प्रायद्वीप मेंकोई नदियाँ या झीलें नहीं हैं

809
00:54:47,955 --> 00:54:51,208
इन पानी के तालों नेप्राचीन माया लोगों को आकर्षित किया।

810
00:54:52,543 --> 00:54:55,170
अगर सिनॉटेस यहाँ ना होते

811
00:54:55,254 --> 00:54:58,924
तो चिचेन इट्ज़ा कायह सांस्कृतिक केन्द्र कभी नहीं बनता।

812
00:54:59,007 --> 00:55:00,425
कुकुलकान पिरामिडचिचेन इट्ज़ा

813
00:55:02,010 --> 00:55:05,639
यहाँ एक उच्च स्तर की संस्कृति विकसित हुईऔर उनके पास लिखने का तरीका,

814
00:55:05,722 --> 00:55:10,686
खगोल-विद्या और पिरामिडोंऔर मंदिरों की वास्तु-कला का ज्ञान था।

815
00:55:20,404 --> 00:55:24,783
उन्होंने टेलीस्कोप आने से भी पहलेएक वेधशाला भी बना ली थी।

816
00:55:25,284 --> 00:55:28,287
उन्होंने खगोलीय वस्तुओं कीस्थिति का भी पता लगाया।

817
00:55:29,746 --> 00:55:35,419
उनका कैलेंडर उस समय के सभी कैलेंडरों मेंसबसे अधिक सही था।

818
00:55:37,588 --> 00:55:42,176
माया लोगों को मृत्यु औरउसके बाद की ज़िंदगी में बहुत दिलचस्पी थी।

819
00:55:43,093 --> 00:55:48,140
उनका मानना था कि नौ अधोलोक हैंऔर 13 स्वर्ग हैं।

820
00:55:53,854 --> 00:55:56,648
अधोलोक का कुछ हिस्सा देखने की इच्छा से

821
00:55:56,732 --> 00:56:00,110
हम पास के एक सिनॉटे में नीचे उतरे।

822
00:56:06,366 --> 00:56:07,951
फ़ातिमा टेक पूलगुफ़ा पुरातत्त्वविद्

823
00:56:08,035 --> 00:56:11,038
फ़ातिमा टेक पूलएक गुफ़ा विशेषज्ञ और पुरातत्त्वविद्,

824
00:56:11,121 --> 00:56:14,374
वर्षा के देवता के एक वास पर लेकर गईं।

825
00:56:17,503 --> 00:56:21,089
इस सिनॉटे का पता अभी हाल ही में चला है।

826
00:56:21,173 --> 00:56:24,801
मुझे बताइए, फ़ातिमा, सिनॉटे, इस गुफ़ा

827
00:56:24,885 --> 00:56:28,472
और माया लोगों के रीति-रिवाज़ोंऔर मान्यता में क्या संबंध है?

828
00:56:29,556 --> 00:56:32,309
यह जगह दिलचस्प हैक्योंकि आप देख सकते हैं

829
00:56:32,392 --> 00:56:36,021
कैसे पानी और गुफ़ाओं कीअवधारणाएँ मिल जाती हैं।

830
00:56:36,605 --> 00:56:39,024
और कैसे माया लोग इस जगहअपनी रस्में किया करते थे।

831
00:56:39,566 --> 00:56:45,656
अंदर, आप दीवारें देख सकते हैं जिससेपता चलता है माया लोग इन पवित्र दीवारों को

832
00:56:45,739 --> 00:56:47,783
पार करने के लिए यहाँ तीर्थ करने आते थे।

833
00:56:47,866 --> 00:56:50,077
-क्या हम अंदर जा सकते हैं?-ज़रूर, चलिए।

834
00:56:58,585 --> 00:57:01,004
चूँकि गुफ़ाओं कोअधोलोक का द्वार माना जाता है,

835
00:57:01,588 --> 00:57:06,510
हम यहाँ देख सकते हैं उन्होंने कैसेगुफ़ा के प्राकृतिक आकार का इस्तेमाल करके

836
00:57:06,593 --> 00:57:09,596
मानव अवशेषों को,संभवतया किसी माया परिवार के पूर्वज को,

837
00:57:09,680 --> 00:57:13,809
विधिवत यहाँ लाकर रखा होगा।

838
00:57:13,892 --> 00:57:17,396
-यह किस काल से हैं?-शायद पुराप्राचीन काल से।

839
00:57:19,648 --> 00:57:22,734
यहाँ पर एक और प्रवेश द्वार है।

840
00:57:22,818 --> 00:57:24,987
यह हमें ज़मीन के और अंदर ले जाता है।

841
00:57:26,113 --> 00:57:29,283
एक और दिलचस्प चीज़ है...

842
00:57:35,205 --> 00:57:37,040
इन्सान की उँगली की हड्डी।

843
00:57:38,083 --> 00:57:42,087
यहाँ दीवार में रखी हुई है।

844
00:57:42,171 --> 00:57:47,050
ध्यान से देखेंगे तो आपको अस्थियाँ दिखेंगी,शायद दीवार में रखने से पहले

845
00:57:47,676 --> 00:57:50,679
किसी प्रकार काकोई अंत्येष्टि संबंधी व्यवहार।

846
00:57:50,762 --> 00:57:53,682
क्या मनुष्यों के लिएअधोलोक में, देवताओं के आवास में

847
00:57:53,765 --> 00:57:55,058
घुसना सुरक्षित है?

848
00:57:55,142 --> 00:57:56,894
हाँ, बिल्कुल।

849
00:58:14,203 --> 00:58:18,040
हम वहाँ मेक्सिकनमृतकों के दिवस के समय गए थे।

850
00:58:18,790 --> 00:58:21,502
माया लोगों को मृत्यु का जुनून था।

851
00:58:22,461 --> 00:58:26,507
अनगिनत चित्र वल्लरी हैंजिनमें केवल खोपड़ियाँ बनी हुई हैं।

852
00:58:39,853 --> 00:58:42,481
मेरीदा, केन्द्रिय कब्रिस्तान।

853
00:58:43,023 --> 00:58:46,652
यह सब कुछ चिकक्षुलुब क्रेटर की परिधि में।

854
00:58:49,404 --> 00:58:52,950
मृतक अपनी कब्रों से उठ करजीवित लोगों से मिलने आते हैं।

855
01:01:08,836 --> 01:01:14,883
पार्क ऑफ़ कास्टल गन्डॉलफ़ोपोप का ग्रीष्म आवास

856
01:01:23,934 --> 01:01:25,811
हम यहाँ पोप के ग्रीष्म आवास,

857
01:01:25,894 --> 01:01:29,731
कास्टल गन्डॉलफ़ो केनिर्मल, शांत पार्क में हैं।

858
01:01:30,148 --> 01:01:33,861
पर, यहाँविज्ञान का महत्वपूर्ण काम हो रहा है।

859
01:01:35,112 --> 01:01:41,368
यहाँ एक खगोलीय वेधशाला है जो अपनेखगोलीय नक्शे की फोटो के लिए मशहूर है।

860
01:01:42,786 --> 01:01:48,292
घर के साथ ही है, अल्बानो झील,जो एक भयानक ज्वालामुखीय गड्ढा है।

861
01:01:51,128 --> 01:01:55,424
वेधशाला के डायरेक्टर एक जेस्युट हैं,ब्रदर गाइ कॉन्सोलमान्यो।

862
01:01:55,507 --> 01:01:57,676
ब्रदर गाइ कॉन्सोलमान्यो, एसजेभूमंडलीय वैज्ञानिक

863
01:01:57,759 --> 01:02:00,971
वह उल्का-पिंडों से संबंधित विज्ञान केसर्वश्रेष्ठ विद्वानों में से हैं।

864
01:02:01,972 --> 01:02:05,267
ब्रदर गाइ, वैटिकन वेधशाला के केन्द्र में

865
01:02:05,350 --> 01:02:07,352
एक शानदार उल्का-पिंडों का संग्रह है।

866
01:02:07,436 --> 01:02:09,188
ऐतिहासिक संग्रह है।

867
01:02:09,271 --> 01:02:10,439
मेरा तो वाक़ई यही मानना है।

868
01:02:10,522 --> 01:02:13,567
मैं इस सब परलगभग 30 साल से काम कर रहा हूँ।

869
01:02:13,650 --> 01:02:15,569
क्या आप शुरू में यहाँ इसी के लिए आए थे?

870
01:02:15,652 --> 01:02:17,613
यहाँ आने का फ़ैसला मेरा नहीं था।

871
01:02:17,696 --> 01:02:20,282
मैं तो यहाँ आज्ञापालन कीशपथ के कारण आया था।

872
01:02:20,365 --> 01:02:23,202
मैं एक वैज्ञानिक थाऔर फिर जेस्यूट में शामिल हो गया

873
01:02:23,285 --> 01:02:26,955
और मुझे लगा मैं जॉर्जटाउन जैसेकिसी स्कूल में पढ़ाऊँगा।

874
01:02:27,039 --> 01:02:30,751
पर आज्ञापालन के तहत उन्होंने मुझेरोम आने का और यहाँ आकर

875
01:02:30,834 --> 01:02:34,087
यह खराब खाना खानेऔर यह बेकार दृश्य देखने का आदेश दिया।

876
01:02:34,171 --> 01:02:37,424
और हाँ, यहाँएक हज़ार उल्का-पिंडों का संग्रह भी है।

877
01:02:37,508 --> 01:02:39,968
उन्हें नहीं पता था यहाँ उल्का-पिंड हैं।

878
01:02:40,052 --> 01:02:43,138
उन्हें नहीं पता था मेरी विशेषज्ञताउल्का-पिंडों में है।

879
01:02:43,222 --> 01:02:46,099
यह बस एक दैवीय संयोग था।

880
01:02:46,183 --> 01:02:48,644
यह अद्भुत है कि हमारे पास उल्का-पिंड हैं,

881
01:02:48,727 --> 01:02:53,023
कि हमारे पास बाह्य अंतरिक्ष के टुकड़े हैंजो पृथ्वी पर हमारे पास आए,

882
01:02:53,106 --> 01:02:55,400
और हमें पता चल गयाकि वे पृथ्वी के नहीं हैं,

883
01:02:55,484 --> 01:02:58,403
कि वे रासायनिक तौर परबिल्कुल अलग चीज़ों से बने हैं,

884
01:02:58,487 --> 01:03:01,073
कि वे 450 करोड़ साल पहले बने थे।

885
01:03:01,156 --> 01:03:04,243
कि हम में यह सब चीज़ें समझने की क्षमता है,

886
01:03:04,326 --> 01:03:05,994
यही एक चमत्कार है।

887
01:03:06,703 --> 01:03:11,166
और आपको यह तर्कसंगत लगता हैकि ब्रह्माण्ड में कहीं और जीवन है,

888
01:03:11,250 --> 01:03:14,253
कि पृथ्वी का जीवनकहीं और आरंभ हुआ हो सकता है?

889
01:03:14,336 --> 01:03:17,381
यह संभव है। मुझे नहीं पता।मेरे पास डेटा नहीं है।

890
01:03:17,464 --> 01:03:19,675
कई बार लोग मुझे पूछते हैं,

891
01:03:19,758 --> 01:03:22,219
क्या मुझे लगता है किब्रह्माण्ड में कहीं और जीवन है?

892
01:03:22,302 --> 01:03:24,429
और मुझे लगता हैयह ये पूछने का सही तरीका है।

893
01:03:24,513 --> 01:03:27,850
यह विश्वास की बात है।मेरे पास डेटा नहीं है।

894
01:03:28,559 --> 01:03:30,644
पर अगर आपएक वैज्ञानिक के तौर पर मेरे पास आएँ

895
01:03:30,727 --> 01:03:32,771
और कहें आप जीवन कीतलाश करने के लिए साधन चाहते हैं

896
01:03:32,855 --> 01:03:35,148
और आपके पास बढ़िया प्रोजेक्ट है,मैं कहूँगा, "ज़रूर करो।"

897
01:03:35,232 --> 01:03:37,150
पर दूसरी ओर, अगर आप कहें,आप उड़नतश्तरी से निकलने वाले

898
01:03:37,234 --> 01:03:39,820
नन्हे हरे आदमियों के बारे मेंअध्ययन करना चाहते हैं,

899
01:03:39,903 --> 01:03:42,322
तो मुझे नहीं लगता मैं उसमें साथ दूँगा।

900
01:03:42,406 --> 01:03:47,035
पर अगर वे हरे आदमी पृथ्वी पर आ जाएँतो आप उनका बप्तिस्मा करेंगे?

901
01:03:47,452 --> 01:03:48,745
केवल उनके कहने पर।

902
01:03:50,831 --> 01:03:54,835
ब्रदर गाइ ने हमें ऐतिहासिकटेलीस्कोप देखने के लिए निमंत्रण दिया।

903
01:03:54,918 --> 01:03:57,588
...जिसे पूरे आकाश कीतस्वीरें खींचने और एक फ़ोटोग्राफिक एटलस

904
01:03:57,671 --> 01:03:59,298
बनाने के लिए लगाया गया था।

905
01:03:59,798 --> 01:04:02,801
पूरे इतिहास के दौरान और पूरी दुनिया मेंलोग यह क्यों मानते हैं

906
01:04:02,885 --> 01:04:06,597
कि स्वर्ग कहीं ऊपर है?

907
01:04:07,973 --> 01:04:09,641
पता नहीं पर यह सच है।

908
01:04:09,725 --> 01:04:11,518
मतलब, इतनी सारी भाषाएँ हैं

909
01:04:11,602 --> 01:04:14,605
जहाँ "आकाश" और "स्वर्ग" के लिएएक ही शब्द इस्तेमाल होता है।

910
01:04:15,939 --> 01:04:17,149
मैं केवल यही सोच सकता हूँ...

911
01:04:17,232 --> 01:04:20,611
और शायद कोई व्यावसायिक इसकाबेहतर जवाब दे सके...

912
01:04:20,694 --> 01:04:24,364
मैं केवल यही सोच सकता हूँकि सितारों को देख कर

913
01:04:24,448 --> 01:04:29,745
आप में इस विशाल ब्रह्माण्ड का छोटा साहिस्सा होने की भावना जाग्रत होती है जो

914
01:04:29,828 --> 01:04:32,623
किसी देवता से मिलने के लिएख़ुद को तैयार करने के लिए ज़रूरी है।

915
01:04:33,790 --> 01:04:35,918
आज जब आप कोई टूटा तारा देखते हैं

916
01:04:36,001 --> 01:04:40,088
तो आपको वह दिलचस्प वैज्ञानिक तथ्य लगता हैया आप अचंभित रह जाते हैं?

917
01:04:40,172 --> 01:04:42,299
हाँ। दोनों होते हैं।

918
01:04:43,634 --> 01:04:48,055
और सच कहूँ शायद मैं विज्ञान जानता हूँ,इसीलिए और ज़्यादा प्रभावित होता हूँ।

919
01:04:48,805 --> 01:04:51,558
यह कहना एक चीज़ है,"ओह, कितनी सुंदर रोशनी है।"

920
01:04:51,642 --> 01:04:52,935
और यह कहना और बात है,

921
01:04:53,018 --> 01:04:55,562
"मुझे पता है कौन से तत्वयह रोशनी बना रहे हैं।

922
01:04:55,646 --> 01:04:57,773
मुझे पता है यह वाला रंग कैसे आया।

923
01:04:57,856 --> 01:05:00,817
मुझे पता है मैं इससे क्या जान सकता हूँ।

924
01:05:00,901 --> 01:05:03,612
आशा है किसी कैमरे ने इसे कैद किया होगाताकि मैं ना केवल,

925
01:05:03,695 --> 01:05:06,073
'कितना सुंदर था,' को नाप सकूँ

926
01:05:06,156 --> 01:05:10,285
बल्कि इसे भी कि, 'यह मुझे किसी धूमकेतू कीधूल के बारे में कुछ बता रहा है।'

927
01:05:10,369 --> 01:05:15,040
किसी धूमकेतू के पीछे छूटा धूल का गुबारजिसमें पृथ्वी घुस रही है

928
01:05:15,123 --> 01:05:17,709
और जैसे बर्फ के कणआपकी विंडस्क्रीन से टकराते हैं,

929
01:05:17,793 --> 01:05:21,880
यह रोशनी की किरणेंहमारे वायुमण्डल से टकरा रही हैं।"

930
01:05:22,840 --> 01:05:27,344
यह सब आपकी ख़ुशी को बढ़ाता है।उसे कम नहीं करता।

931
01:05:27,427 --> 01:05:31,223
यह आपको याद दिलाता हैज्ञान के विभिन्न वर्गों की गतिकी की,

932
01:05:31,306 --> 01:05:35,352
तर्कशील और काव्यात्मक की,कल्पनात्मक और बौद्धिक की।

933
01:05:35,435 --> 01:05:39,523
और मुझे लगता है कि आप विचारों कीसमान प्रक्रियाएँ इस्तेमाल करते हैं,

934
01:05:39,606 --> 01:05:43,902
ब्रह्माण्ड जैसे विशाल मामलों कोसमझने के लिए

935
01:05:43,986 --> 01:05:46,530
और आत्मा जैसे आंतरिक मामलों कोसमझ पाने के लिए भी।

936
01:05:47,406 --> 01:05:50,742
तुम एक के बिना दूसरा नहीं कर सकते।

937
01:05:51,159 --> 01:05:52,911
तुम विज्ञान नहीं कर सकते...

938
01:05:52,995 --> 01:05:55,080
तुम विज्ञान करना नहीं चाहते

939
01:05:55,163 --> 01:06:00,002
अगर तुम में वह विस्मय का,कौतुहल का भाव नहीं है।

940
01:06:00,752 --> 01:06:04,506
आप किसी सृष्टिकर्ता ईश्वर मेंविश्वास नहीं कर सकते

941
01:06:04,590 --> 01:06:07,301
अगर आपने सृष्टि अनुभव नहीं की है।

942
01:06:07,759 --> 01:06:09,970
नहीं तो आपके विश्वास का क्या मतलब है?

943
01:06:11,138 --> 01:06:14,516
और मुझे पता है आपने 70 के दशक में,ग्रेजुएशन करने के दौरान

944
01:06:14,600 --> 01:06:16,268
वेस्ट धूमकेतू देखने के बारे में बताया था।

945
01:06:16,351 --> 01:06:20,647
और आपने कहा था, "क्या वह प्रभावशाली था?नहीं, वह डरावना था।"

946
01:06:20,731 --> 01:06:23,442
उसने आपको भीतर तक डरा दिया था,आपने कहा था। क्यों?

947
01:06:24,651 --> 01:06:26,695
आकाश में एक धूमकेतू था

948
01:06:26,778 --> 01:06:30,282
जो आपकी देखी हर धूमकेतू कीतस्वीर की तरह था।

949
01:06:30,365 --> 01:06:33,619
एक ऐसी चीज़ जो आपको लगता थाकेवल तस्वीरों में होती है।

950
01:06:33,702 --> 01:06:35,245
और अब वह वहाँ नहीं था।

951
01:06:35,329 --> 01:06:37,289
और वह बड़ा था। डरावना था।

952
01:06:37,372 --> 01:06:40,042
और वह कल वहाँ नहीं था।लगा, "यह हो क्या रहा है?"

953
01:06:41,001 --> 01:06:44,755
और फिर समझ में आयाकि प्राचीन लोग धूमकेतू आदि को देखकर

954
01:06:44,838 --> 01:06:50,135
उसे किसी डरावनी चीज़,किसी अपशकुन की पूर्वसूचना क्यों मानते थे।

955
01:06:50,802 --> 01:06:55,349
अगर नासा के टेलीस्कोप किसी वाक़ईखतरनाक वस्तु को

956
01:06:55,432 --> 01:06:59,311
तेज़ गति से पृथ्वी की ओर बढ़ते हुए देखें,तो चर्च की क्या प्रतिक्रिया होगी?

957
01:06:59,937 --> 01:07:03,815
सच बताऊँ। हम प्रार्थना करेंगे।और क्या कर सकते हैं?

958
01:07:05,609 --> 01:07:08,028
"डीप इम्पैक्ट"

959
01:07:08,111 --> 01:07:10,781
मैं एक फ़िल्म काकुछ अंश दिखाना चाहता हूँ

960
01:07:10,864 --> 01:07:13,742
जहाँ शारीरिक और अस्तित्वपरक डर

961
01:07:13,825 --> 01:07:16,912
जैसी डरावनी चीज़ों में हीदर्शकों को मज़ा आता है।

962
01:07:17,371 --> 01:07:19,164
यह बहुत अच्छी तरह से फ़िल्माया गया है।

963
01:07:54,116 --> 01:07:56,785
ब्रदर गाइ की प्रार्थना के अलावा,

964
01:07:56,869 --> 01:07:59,913
कुछ व्यावहारिक उपाय अपनाए जा चुके हैं।

965
01:08:00,497 --> 01:08:02,457
हम यहाँ पैन-स्टार्स में हैं...

966
01:08:02,541 --> 01:08:04,418
पैन-स्टार्स वेधशालाहालिअकाला, हवाई

967
01:08:04,501 --> 01:08:07,963
..."पैनोरमिक सर्वे टेलीस्कोपएंड रेपिड रिस्पॉन्स सिस्टम,"

968
01:08:08,046 --> 01:08:11,633
जो हवाई के एक टापू, माउई पर स्थित है।

969
01:08:11,717 --> 01:08:13,886
अच्छा, ब्रेक छोड़ दी है।

970
01:08:13,969 --> 01:08:15,554
डॉना रोहरेरपैन-स्टार्स टेलीस्कोप टेक्नीशियन

971
01:08:15,637 --> 01:08:17,639
सब लोग पीछे हो जाओ।मैं इसे नीचे ला रही हूँ।

972
01:08:17,723 --> 01:08:21,602
यहाँ, रख-रखाव के दौरान एक टेलीस्कोप।

973
01:08:44,582 --> 01:08:46,417
हम यह कर लेते हैं।

974
01:08:46,502 --> 01:08:48,962
-हाँ, मैं कोशिश करती हूँ।-हाँ। ठीक है।

975
01:08:49,046 --> 01:08:50,339
पैन-स्टार्स संचालन केन्द्र

976
01:08:52,424 --> 01:08:54,676
डॉ. जोएना बुलजर कोज़िम्मेदारी दी गई है...

977
01:08:54,760 --> 01:08:56,470
जोएना बुलजरखगोल विद्या का संस्थान, हवाइ

978
01:08:56,553 --> 01:08:58,596
...कि उन्हें मानवता को सुरक्षित रखना है।

979
01:09:01,850 --> 01:09:04,895
और उनके सहयोगी, डॉ. मार्क विलमैन को भी।

980
01:09:05,812 --> 01:09:09,066
उनके चेहरों को देख कर हीहमारा विश्वास बढ़ गया।

981
01:09:09,149 --> 01:09:10,901
मार्क विलमैनखगोल विद्या का संस्थान, हवाई

982
01:09:14,071 --> 01:09:17,448
उन्होंने अपनी रात की ड्यूटी के समयहमें वहाँ आने दिया।

983
01:09:17,533 --> 01:09:19,868
-हैलो।-आह, क्लाइव, हैलो।

984
01:09:19,952 --> 01:09:22,371
-मैंने तुम्हें ढूँढ लिया। रात के पहरेदार।-कैसे हो?

985
01:09:22,453 --> 01:09:24,997
-आओ, बैठो।-बैठो।

986
01:09:25,624 --> 01:09:30,546
ख़तरनाक इरादों वाले अंतरिक्ष के पत्थरों सेहमारी रक्षा करने में मदद कर रहे हो।

987
01:09:30,629 --> 01:09:32,840
हम अभी देख ही रहे थे पर हमें बंद करना पड़ा

988
01:09:32,923 --> 01:09:34,800
क्योंकि नमी बढ़ गई थी।

989
01:09:34,883 --> 01:09:37,051
हम अब 90 प्रतिशत पर हैं

990
01:09:37,135 --> 01:09:39,680
और हमें शीशे को बचाने के लिए 85 प्रतिशत परबंद करना होता है।

991
01:09:39,763 --> 01:09:42,057
शीशे पर गीलापन नहीं आना चाहिए।

992
01:09:42,140 --> 01:09:45,560
और टेलीस्कोप पर बैठे संचालकों सेआप संपर्क कैसे करते हैं?

993
01:09:45,644 --> 01:09:49,398
वह... हम ही संचालक हैं।

994
01:09:49,481 --> 01:09:52,317
वहाँ चोटी पर कोई नहीं बैठा।अब दूर से ही निगरानी की जाती है।

995
01:09:52,401 --> 01:09:54,945
वह पुराना तरीका था,जहाँ चोटी पर जाना पड़ता था।

996
01:09:55,028 --> 01:09:56,488
वह 10,000 फ़ीट पर है

997
01:09:56,572 --> 01:09:59,157
तो यहाँ 2,000 फ़ीट पर ज़्यादा आराम है।

998
01:10:00,659 --> 01:10:01,952
तो, क्या हो रहा है?

999
01:10:02,035 --> 01:10:04,371
यह स्क्रीन, यह शायदरात के समय आकाश दिखा रही है।

1000
01:10:04,454 --> 01:10:06,039
हाँ, यह आकाश का नक्शा है।

1001
01:10:06,123 --> 01:10:08,166
आप देख सकते है, वह शिरोबिंदु है।

1002
01:10:08,250 --> 01:10:10,752
वह बिल्कुल ऊपर है। और यह है टेलीस्कोप।

1003
01:10:11,879 --> 01:10:15,007
और यह है वह लक्ष्यजिस पर हम नज़र रख रहे थे।

1004
01:10:15,090 --> 01:10:16,842
हम क़रीब 60 तस्वीरें लेते हैं,

1005
01:10:16,925 --> 01:10:21,805
और आकाश में एक ही जगह कीचार तस्वीरें आती हैं।

1006
01:10:21,889 --> 01:10:24,808
तो फिर हमारे पास एक नन्ही सीफ़िल्म होती है, चार तस्वीरों की फ़िल्म।

1007
01:10:24,892 --> 01:10:27,019
और उससे हम गतिमान लक्ष्य पकड़ सकते हैं।

1008
01:10:27,102 --> 01:10:29,146
और आपके पास पृथ्वी के सबसे बड़े कैमरे हैं।

1009
01:10:29,229 --> 01:10:30,480
-यह सही है?-हाँ, हैं।

1010
01:10:30,564 --> 01:10:31,982
मेरे पास 12 मेगापिक्सेल का कैमरा है।

1011
01:10:32,065 --> 01:10:34,151
-बारह मेगापिक्सेल।-आपका कैमरा कितना है?

1012
01:10:34,234 --> 01:10:37,321
हमारा कैमरा100 करोड़ पिक्सेल से ज़्यादा का है,

1013
01:10:37,404 --> 01:10:40,282
तो एक... एक आम उपभोक्ता कैमरे से

1014
01:10:40,365 --> 01:10:44,328
यह... यह बहुत ज़्यादा बड़ा है।

1015
01:10:46,496 --> 01:10:48,957
इस तस्वीर में क्या हो रहा है?

1016
01:10:49,041 --> 01:10:51,043
-क्या यह पिक्सेल एरे है?-हाँ, बिल्कुल सही।

1017
01:10:51,126 --> 01:10:53,337
तो यह बिना एडिट की हुई तस्वीर है।

1018
01:10:53,420 --> 01:10:56,215
तो यहाँ 45 सेकंड का एक्सपोज़र है।

1019
01:10:56,298 --> 01:11:01,053
और आप कैमरे का आकार भी देख सकते हो।

1020
01:11:02,346 --> 01:11:05,724
तो यह... हम... हमेंतीन डिग्री का फ़ील्ड ऑफ़ व्यू मिलता है

1021
01:11:05,807 --> 01:11:08,352
जो आकाश पर सात वर्ग डिग्री होता है।

1022
01:11:08,936 --> 01:11:11,355
और कैमरे में एड्रैसेबल सीसीडीज़ का

1023
01:11:11,438 --> 01:11:16,026
आठ बटा आठ का एरे है।

1024
01:11:16,527 --> 01:11:19,404
तो अगर आप वास्तव में...हम एक तस्वीर को क्लिक कर सकते हैं।

1025
01:11:19,488 --> 01:11:21,198
-यह वाली।-वह क्या है?

1026
01:11:21,281 --> 01:11:23,325
-क्या वह कोई उल्का है?-यह?

1027
01:11:23,408 --> 01:11:27,287
नहीं। यह दो उपग्रह हैंजो हमारे फ़ील्ड ऑफ़ व्यू में आ गए हैं।

1028
01:11:27,704 --> 01:11:29,873
यह बहुत संतोषजनक काम है, क्योंकि...

1029
01:11:32,417 --> 01:11:36,004
हम डायनोसॉर्स की तरहख़त्म नहीं होना चाहते और...

1030
01:11:36,088 --> 01:11:38,173
तो इन चीज़ों पर नज़र रखना फ़ायदेमंद है।

1031
01:11:38,257 --> 01:11:43,345
हालाँकि संभावना कम ही है कि कोईबड़ा उल्का-पिंड हमसे जल्दी टकराने वाला है।

1032
01:11:44,096 --> 01:11:47,140
पर कभी ना कभी, एक बड़ा वाला आएगा,

1033
01:11:47,224 --> 01:11:49,309
तो हम उसके लिए नज़र रख रहे हैं।

1034
01:11:50,769 --> 01:11:53,272
मुझे लगता हैमैं रात को ज़्यादा अच्छी तरह सो पाऊँगा

1035
01:11:53,355 --> 01:11:56,650
यह जानकर कि आने वाली उल्काओं परनज़र रखने के लिए यहाँ रात को भी

1036
01:11:56,733 --> 01:12:00,112
कोई हमेशा ड्यूटी पर होता है।यह बहुत बढ़िया बात है।

1037
01:12:00,195 --> 01:12:02,322
साल के 365 दिन, हाँ। हर रात।

1038
01:12:02,406 --> 01:12:04,658
धन्यवाद।हमारी सुरक्षा करने के लिए धन्यवाद।

1039
01:12:05,284 --> 01:12:07,369
-आपका स्वागत है। यह हमारा सौभाग्य है।-हाँ।

1040
01:12:07,953 --> 01:12:12,040
रात के आकाश की तस्वीरों काविश्लेषण डॉ. रॉब वेरिक करते हैं...

1041
01:12:12,124 --> 01:12:13,917
रॉब वेरिकखगोल विद्या का संस्थान, हवाई

1042
01:12:14,001 --> 01:12:16,211
...जो कैनेडा से आएएक भूमंडलीय रक्षा अनुसंधानकर्ता हैं।

1043
01:12:17,462 --> 01:12:20,299
यक़ीन नहीं होताआप पहली बार टेलीस्कोप के पास आए हैं।

1044
01:12:20,382 --> 01:12:23,677
हाँ, आमतौर पर मेरा ध्यान डेटा के विश्लेषण,चीज़ों के पुनरीक्षण पर केंद्रित रहता है।

1045
01:12:23,760 --> 01:12:25,679
तो अच्छा लगा,टेलीस्कोप देखने का अवसर मिला।

1046
01:12:25,762 --> 01:12:29,057
क्या यह ऐसा लगा जैसे किसी ऐसे भाई सेमिले हो जिससे पहले कभी नहीं मिले?

1047
01:12:29,141 --> 01:12:30,517
यह सच है। हाँ।

1048
01:12:30,601 --> 01:12:33,979
वे रात के अंत मेंडेढ़ घंटे के लिए टेलीस्कोप खोल पाए।

1049
01:12:34,062 --> 01:12:36,398
हमने आज सुबह डेटा का पुनरीक्षण किया।

1050
01:12:36,481 --> 01:12:38,901
और मुझे छः नईसंभावित ख़तरनाक चीज़ें मिलीं।

1051
01:12:38,984 --> 01:12:40,277
"हम" का मतलब "आप।" वे आपको मिलीं।

1052
01:12:40,360 --> 01:12:42,070
हाँ। हम सब मिल कर ही काम करते हैं

1053
01:12:42,154 --> 01:12:43,822
पर मैं पुनरीक्षण करता हूँ तो...

1054
01:12:43,906 --> 01:12:46,283
अब तक आपने कौन सीसबसे अधिक रोमांचक वस्तु ढूँढी है?

1055
01:12:46,366 --> 01:12:49,369
तो, हमने जो सबसे अधिक रोमांचक वस्तु ढूँढी,वह ऊमुआमुआ के नाम से जानी गई।

1056
01:12:49,453 --> 01:12:51,330
वह दरअसल पहला अंतर्तारकीय धूमकेतू है।

1057
01:12:51,413 --> 01:12:53,707
यह धूमकेतूहमारे सौर मंडल के बाहर से आया है।

1058
01:12:53,790 --> 01:12:56,335
हमने पहली बार ऐसी कोई चीज़ देखी थी। हाँ।

1059
01:12:56,418 --> 01:12:57,586
ऊमुआमुआ?

1060
01:12:57,669 --> 01:12:59,880
ऊमुआमुआ। यह एक हवाइयन शब्द है।

1061
01:12:59,963 --> 01:13:01,965
इसका मतलब है"दूर से आया पहला संदेशवाहक।" हाँ।

1062
01:13:02,049 --> 01:13:03,050
ठीक है।

1063
01:13:03,759 --> 01:13:05,844
तो यह दो चरणों की प्रक्रिया होती है।

1064
01:13:05,928 --> 01:13:09,306
कंप्यूटर का सॉफ़्टवेयर पूरा सही नहीं होताऔर मानव पुनरीक्षण की ज़रूरत होती है,

1065
01:13:09,389 --> 01:13:10,849
वह मेरा काम है।

1066
01:13:10,933 --> 01:13:14,478
तो मेरी मुख्य ज़िम्मेवारी है रात कोदिखने वाली सभी चीज़ों का पुनरीक्षण करना।

1067
01:13:14,561 --> 01:13:16,313
और जो चीज़ें असली हैं,

1068
01:13:16,396 --> 01:13:20,400
वे बिंदुओं की श्रृंखला या ट्रेल्डवस्तुओं के रूप में नज़र आते हैं।

1069
01:13:20,484 --> 01:13:22,653
क्या यह देखने वाले आप पहले व्यक्ति हैं?

1070
01:13:22,736 --> 01:13:25,322
तो प्रेक्षक डेटा इकट्ठा करते हैं

1071
01:13:25,405 --> 01:13:28,492
इसे देखकर इसका पुनरीक्षण करने वालामैं ग्रह पर पहला व्यक्ति हूँ

1072
01:13:28,575 --> 01:13:30,452
और मैं इसे प्रस्तुत करूँगातो ख़तरे की घंटी बजेगी

1073
01:13:30,536 --> 01:13:32,871
अगर कोई ऐसी वस्तु हुईजो पृथ्वी के लिए खतरा है।

1074
01:13:34,498 --> 01:13:37,543
खतरे की घंटी तुरंत नासा के

1075
01:13:37,626 --> 01:13:41,255
भूमंडलीय रक्षा समन्वय कार्यालय काध्यान खींचेगी।

1076
01:13:42,089 --> 01:13:44,132
इसके अस्तित्व के बारे मेंकुछ ही लोग जानते हैं।

1077
01:13:44,216 --> 01:13:45,801
भूमंडलीय रक्षा समन्वय कार्यालय

1078
01:13:45,884 --> 01:13:48,887
यहाँ की ज़िम्मेवारी डॉ. कैली फास्ट की हैजो एक खगोल विज्ञानी हैं।

1079
01:13:48,971 --> 01:13:49,972
कैली फास्टखगोल विज्ञानी

1080
01:13:50,347 --> 01:13:52,516
मैंने सुना है आप क्षुद्रग्रहों को

1081
01:13:52,599 --> 01:13:54,101
सौर मंडल के कीड़े-मकोड़े कहती हैं।

1082
01:13:54,184 --> 01:13:55,769
उन्हें यह क्यों बुलाती हैं आप?

1083
01:13:56,478 --> 01:14:01,108
कुछ खगोल विज्ञानी जो क्षुद्रग्रहों केअलावा और चीज़ों को देख रहे हैं,

1084
01:14:02,192 --> 01:14:03,652
शायद वे अपने लक्ष्यों को देख रहे हों

1085
01:14:03,735 --> 01:14:08,031
और अचानक क्षुद्रग्रहउनके रास्ते में आ जाएँगे।

1086
01:14:08,115 --> 01:14:11,118
तो उस दृष्टि से,अगर आप किसी और चीज़ को देख रहे हो

1087
01:14:11,201 --> 01:14:13,412
तो वे सौर मंडल के कीड़े-मकोड़े हैं।

1088
01:14:14,121 --> 01:14:15,873
तो नासा में हमारे दृष्टिकोण से,

1089
01:14:15,956 --> 01:14:20,586
वे विज्ञान के लिए, अंतरिक्षयानों कालक्ष्य बनने के लिए बहुत अच्छे हैं,

1090
01:14:20,669 --> 01:14:22,421
पर हम उन पर नज़र भी रखना चाहते हैं

1091
01:14:22,504 --> 01:14:27,009
क्योंकि दो चीज़ों का एक ही समय मेंएक ही जगह पर होना अच्छा नहीं है।

1092
01:14:27,092 --> 01:14:30,804
तो हम जानना चाहते हैं उनमें से कोईपृथ्वी की कक्षा में तो नहीं आने वाला

1093
01:14:30,888 --> 01:14:33,307
जब पृथ्वी वहाँ से गुज़रेगी।

1094
01:14:33,390 --> 01:14:35,976
पृथ्वी के वायुमंडल सेहमेशा धूल टकराती रहती है।

1095
01:14:36,059 --> 01:14:37,936
हमें टूटते तारे दिखते हैं,

1096
01:14:38,020 --> 01:14:39,980
वह बस वायुमंडल में जलती हुई धूल है।

1097
01:14:40,063 --> 01:14:43,025
पर अगर चीज़ें बड़ी हों,

1098
01:14:43,108 --> 01:14:45,903
क्षुद्रग्रहों के आकार की चीज़ें हों...

1099
01:14:47,070 --> 01:14:49,865
पृथ्वी का वायुमंडलचीज़ें जलाने के लिए बहुत बढ़िया है

1100
01:14:49,948 --> 01:14:52,159
पर कई बार चीज़ें इतनी बड़ी होती हैंकि वह नहीं हो पाता।

1101
01:14:52,242 --> 01:14:55,454
चेल्याबिंस्क, 20 मीटर।तबाही मच गई थी।

1102
01:14:56,246 --> 01:14:58,707
टुन्गुस्का, साइबेरिया, सन् 1908 में।

1103
01:14:58,790 --> 01:15:02,002
वह शायद 40 मीटर का क्षुद्रग्रह था।

1104
01:15:02,085 --> 01:15:04,296
टुन्गुस्का, साइबेरिया, 1908

1105
01:15:04,379 --> 01:15:08,342
उसके विस्फोट से 80 मिलियन पेड़ ढह गए थे।

1106
01:15:08,425 --> 01:15:13,096
पर उस क्षुद्रग्रह का कभी भीएक भी कण नहीं मिला है।

1107
01:15:16,225 --> 01:15:19,937
और बचाव? क्या कर सकते हैं हमअगर कोई बड़ी वस्तु हमारी ओर आई?

1108
01:15:20,020 --> 01:15:21,980
उसके बारे में हम क्या कर सकते हैं?

1109
01:15:22,064 --> 01:15:24,691
सबसे अच्छा बचाव तो तैयार रहना ही है।

1110
01:15:24,775 --> 01:15:26,652
और इसलिए उन्हें पहले ही ढूँढ लेना...

1111
01:15:26,735 --> 01:15:29,363
आप नहीं जान सकते अपना बचाव कैसे करेंजब तक वह दिखते नहीं हैं।

1112
01:15:29,446 --> 01:15:31,490
तो सबसे पहला काम तो वही है।

1113
01:15:31,573 --> 01:15:34,076
और ज़मीन के सर्वेक्षणों सेयही किया जा रहा है।

1114
01:15:34,535 --> 01:15:36,203
अगर आप इसके बारे में ऐसे सोचें:

1115
01:15:36,286 --> 01:15:37,120
आपके पास सूरज है,

1116
01:15:37,204 --> 01:15:39,957
आपके पास पृथ्वी और अन्य ग्रह हैंजो सूरज के इर्दगिर्द चक्कर काट रहे हैं,

1117
01:15:40,040 --> 01:15:41,208
जैसे किसी रेसट्रैक पर हों।

1118
01:15:41,291 --> 01:15:44,169
और फिर क्षुद्रग्रह भी रेसट्रैक परसूरज के चक्कर काट रहे हों।

1119
01:15:44,253 --> 01:15:47,005
तो कितनी ही बार इनके आपस मेंक़रीब आने की संभावना है।

1120
01:15:47,089 --> 01:15:49,925
बल्कि, यह अक्सर होता है,जब कोई "निकट पहुँचता" है,

1121
01:15:50,008 --> 01:15:53,011
जब कोई क्षुद्रग्रहपृथ्वी के पास आता है, जो...

1122
01:15:53,095 --> 01:15:56,390
पास का मतलब है,चंद्रमा की दूरी से कई गुना अधिक दूर।

1123
01:15:56,849 --> 01:15:58,517
पर चलो मान लें यह बहुत बड़ा है।

1124
01:15:58,600 --> 01:16:02,062
यह बहुत बड़ा क्षुद्रग्रह हैऔर आपके पास ज़्यादा समय नहीं है।

1125
01:16:02,688 --> 01:16:05,148
कई फ़िल्मों में उन्हेंविस्फोट से उड़ाते हुए दिखाया गया है।

1126
01:16:05,232 --> 01:16:06,233
डीप इम्पैक्ट

1127
01:16:06,316 --> 01:16:09,361
ज़रूरी नहीं आपको यही करना पड़े।आपको बस अच्छी तरह धकेलना होगा।

1128
01:16:09,444 --> 01:16:12,823
और आप परमाणु बम जैसी कोई चीज़इस्तेमाल कर सकते हैं

1129
01:16:12,906 --> 01:16:14,283
जैसे इन फिल्मों में करते हैं।

1130
01:16:14,366 --> 01:16:18,245
पर आप क्षुद्रग्रह के पासउसका विस्फोट करेंगे

1131
01:16:18,328 --> 01:16:23,375
और उस विस्फोट की ऊर्जा सतह पर फैल जाएगी

1132
01:16:23,458 --> 01:16:26,211
और क्षुद्रग्रह की सतह सेजो पदार्थ उस धमाके से उड़ेंगे,

1133
01:16:26,295 --> 01:16:28,297
वे उसे दूसरी दिशा में धकेल देंगे।

1134
01:16:30,340 --> 01:16:32,593
एक शांत, अनाक्रामक तरीका...

1135
01:16:32,676 --> 01:16:34,052
रयूगू क्षुद्रग्रह, आकार 1 किमी

1136
01:16:34,136 --> 01:16:38,307
...रयूगू क्षुद्रग्रह पर एक जापानी अंतरिक्षखोज यान द्वारा इस्तेमाल किया गया था।

1137
01:16:39,391 --> 01:16:41,602
क्षुद्रग्रह कितना छोटा है,

1138
01:16:41,685 --> 01:16:46,815
इसका पता उसकी सतह पर पड़तीअंतरिक्ष खोज यान की परछाईं से चलता है।

1139
01:16:49,651 --> 01:16:53,906
गुरुत्वाकर्षण इतना थोड़ा हैकि बहुत धीरे से उतरने पर भी

1140
01:16:53,989 --> 01:16:58,702
ढेर सारा मलबा उससे परे,अंतरिक्ष में फेंका जाता है।

1141
01:17:00,621 --> 01:17:03,749
यहाँ पर हम देख सकते हैंउल्का-पिंडों का जन्म कैसे होता है।

1142
01:17:05,042 --> 01:17:08,962
अंतरिक्ष खोज यान धरती की ओर वापस आ रहा है,

1143
01:17:09,046 --> 01:17:12,799
और अपने साथ क्षुद्रग्रह से उठाया हुआएक ग्राम ला रहा है।

1144
01:17:13,842 --> 01:17:18,138
पर बड़े नमूने के लिए,अंटार्कटिका स्वर्ग की तरह है।

1145
01:17:21,767 --> 01:17:25,062
ऐसा नहीं है कि यहाँबाकी जगहों से ज़्यादा पत्थर गिरते हैं।

1146
01:17:25,812 --> 01:17:31,401
पर अमरीका से भी बड़े इस महाद्वीप में,जो लगभग पूरा बड़े हिमनदों से ढका है,

1147
01:17:31,485 --> 01:17:34,571
वे दिखते ज़्यादा हैं।

1148
01:17:35,989 --> 01:17:41,078
हमें दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों नेइस तलाश के लिए आने का निमंत्रण दिया।

1149
01:17:41,745 --> 01:17:44,498
उनके स्टेशन का नाम था, जैंग बोगो...

1150
01:17:44,581 --> 01:17:45,832
जैंग बोगो स्टेशनअंटार्कटिका

1151
01:17:45,916 --> 01:17:49,837
...और पूर्वी अंटार्कटिका के तट पर बनेइस स्टेशन में लगभग 50 लोग रहते हैं।

1152
01:17:53,048 --> 01:17:57,052
दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी का मौसमक़रीब पाँच महीने तक रहता है,

1153
01:17:57,469 --> 01:18:00,013
और इस दौरान सूरज कभी नहीं डूबता।

1154
01:18:03,183 --> 01:18:06,895
हमने जितना सोचा था,अंदर उससे ज़्यादा खुली जगह थी।

1155
01:18:08,522 --> 01:18:13,610
कुछ ही मील की दूरी पर,स्कॉट के पिछले अभियान के छः सदस्यों ने

1156
01:18:13,694 --> 01:18:19,825
एक पूरा सर्दी का मौसम केवल नौ फ़ीट की एकबर्फ की गुफा में ठिठुरते हुए गुज़ारा है।

1157
01:18:20,659 --> 01:18:23,620
वे भूखे थे और कड़ी सर्दी मेंगंदगी में रहते हुए

1158
01:18:23,704 --> 01:18:28,417
सील का मीट और हर रोज़एक बिस्कुट खाकर किसी तरह जी रहे थे।

1159
01:18:29,418 --> 01:18:31,837
स्कॉट के आदमियों कीडायरियों से हमें पता चला

1160
01:18:31,920 --> 01:18:37,634
वे सपने देखते थे बढ़िया खाने के जो उनकेमुँह तक पहुँचने से पहले ही गिर जाता था।

1161
01:18:37,718 --> 01:18:42,014
केवल एक आदमी सपने में वास्तव में खा पाया,

1162
01:18:42,097 --> 01:18:45,767
और ज़ाहिर हैउसके दोस्तों को उससे बहुत जलन हुई।

1163
01:18:50,147 --> 01:18:53,317
पर हम यहाँ लोबस्टरऔर किमची खाने नहीं आए थे।

1164
01:18:53,817 --> 01:18:57,988
हम भीतरी ओर ध्रुवीय पठार परजाने के लिए बेताब थे।

1165
01:18:58,822 --> 01:19:02,910
हम जानते थे एक ट्रकों का दलतीन सप्ताह पहले

1166
01:19:02,993 --> 01:19:05,954
हमारे स्टेशन से निकल चुका थाऔर ज़मीनी रास्ते से जाते हुए

1167
01:19:06,038 --> 01:19:10,626
नीली बर्फ पर उल्का-पिंडों को ढूँढने केस्थान के पास पहुँचने वाला था।

1168
01:19:20,928 --> 01:19:25,766
पर उससे पहले हेलिकॉप्टर कोक़रीब 2,000 मीटर ऊँचा उठना होगा।

1169
01:19:26,266 --> 01:19:30,729
तट पर बने स्टेशन से महाद्वीप केबर्फीले पठार तक जाने के लिए

1170
01:19:30,812 --> 01:19:34,691
हमें हिमनद की गिरती हुई बर्फ केऊपर से उड़ कर जाना होगा।

1171
01:19:35,400 --> 01:19:37,569
सोचो इसे पैदल पार करना पड़े तो कैसा होगा।

1172
01:19:38,237 --> 01:19:41,281
इध-उधर बिखरे पड़े पत्थरों में हर एक

1173
01:19:41,365 --> 01:19:43,992
एक ऊँची इमारत से ज़्यादा बड़ा है

1174
01:19:44,076 --> 01:19:47,621
और यह सारा ढेरलगातार समुद्र की ओर बह रहा है।

1175
01:19:51,416 --> 01:19:53,794
आख़िरकार हम पठार पर पहुँच गए।

1176
01:19:54,628 --> 01:19:59,842
कुछ ही पर्वत बचे हैं, जो बर्फ सेटापुओं की तरह बाहर निकले हुए हैं।

1177
01:20:01,677 --> 01:20:06,390
यह एक ऐसी दुनिया में प्रवेश करना हैजो हमारे ग्रह की लगती ही नहीं है।

1178
01:20:11,645 --> 01:20:14,523
यहाँ से शुरू होता है बहुत अधिक अकेलापन

1179
01:20:14,606 --> 01:20:20,737
इस विशाल महाद्वीप का जो दो सेचार किलोमीटर मोटी बर्फ की परत से ढका है।

1180
01:20:26,285 --> 01:20:30,539
जीपीएस डेटा की मदद से,हम कारवाँ की जगह जानते थे।

1181
01:20:31,999 --> 01:20:33,959
वे हमारा इंतज़ार कर रहे थे।

1182
01:20:52,978 --> 01:20:56,315
हमें इसे अभियान के नेता, जौंग इक ली, से

1183
01:20:56,398 --> 01:20:58,692
मिलने का बेसब्री से इंतज़ार था।

1184
01:20:59,526 --> 01:21:03,280
उन्होंने ही हमें अंटार्कटिका आने कानिमंत्रण दिया था और उनसे मिलकर

1185
01:21:03,363 --> 01:21:05,574
ऐसा महसूस हुआकिसी पुराने दोस्त से मिल रहे हैं।

1186
01:21:05,657 --> 01:21:07,492
जौंग इक लीकोरियन ध्रुवीय अनुसंधान संस्थान

1187
01:21:07,576 --> 01:21:09,328
-मुझे नहीं लगा था आप आ पाओगे।-हाँ।

1188
01:21:09,411 --> 01:21:11,330
मुझे नहीं पता था हम पहुँच जाएँगे।

1189
01:21:11,413 --> 01:21:13,290
मेरा सपना...

1190
01:21:13,373 --> 01:21:17,878
हमने वह तस्वीरें देखी थीं जोइन्होंने यहाँ पर कुछ साल पहले खींची थीं।

1191
01:21:18,962 --> 01:21:21,548
इन्हें एक बड़ा उल्का-पिंड मिला था,

1192
01:21:21,632 --> 01:21:26,220
और इस खोज पर उनकी ख़ुशी देखकरहमें उनसे प्यार हो गया।

1193
01:21:27,012 --> 01:21:29,681
यह विज्ञान अपने बेहतरीन रूप में है।

1194
01:21:32,893 --> 01:21:37,814
कोरियन ध्रुवीय अनुसंधान संस्थान केसौजन्य से, 2014

1195
01:22:10,180 --> 01:22:12,474
अच्छा, नीचे।

1196
01:22:21,024 --> 01:22:25,445
कुछ और जो मुझेइस अत्यधिक भावुक क्षण के बारे में पसंद है,

1197
01:22:25,529 --> 01:22:30,075
कुछ ऐसा जो फ़िल्म स्कूलों केबेकार सिद्धांत कभी करने नहीं देंगे।

1198
01:22:31,702 --> 01:22:34,454
पृष्ठभूमि देखिए।एक व्यक्ति प्रवेश करता है।

1199
01:22:34,538 --> 01:22:38,458
उसका यहाँ कोई प्रयोजन नहीं है,गलत समय पर आया है,

1200
01:22:38,542 --> 01:22:40,544
पिछवाड़ा दिख रहा है।

1201
01:22:59,062 --> 01:23:00,856
वापस वर्तमान में।

1202
01:23:01,690 --> 01:23:06,195
हमारे साथ जौंग इक की पत्नी,मी जुंग भी आई थीं,

1203
01:23:06,278 --> 01:23:09,448
जो ख़ुद एक मशहूर ध्रुवीय भूवैज्ञानिक हैं।

1204
01:23:21,251 --> 01:23:23,128
पति-पत्नी का पुनःमिलन।

1205
01:23:24,588 --> 01:23:29,009
पहुँचने के कुछ ही क्षण बाद,हमें हमारा पहला उल्का-पिंड मिला।

1206
01:23:30,260 --> 01:23:34,097
साफ-सुथरी, कोरी, जमी हुई बर्फ़ जिस परगिरती बर्फ़ का कोई नामो-निशान नहीं था,

1207
01:23:34,181 --> 01:23:36,767
उल्का पिंडों को देखने के लिएआदर्श स्थान था।

1208
01:23:37,684 --> 01:23:42,940
बर्फ़ का यह विशाल ढेर धीरे-धीरेचल रहा है, कन्वेयर बेल्ट की तरह

1209
01:23:43,023 --> 01:23:48,612
और उसके नीचे से पत्थर निकल कर दिखते हैंजो शायद हज़ारों साल पहले गिरे होंगे।

1210
01:23:51,782 --> 01:23:55,369
ज़्यादातर उल्का-पिंडसमुद्र तक चले जाते हैं।

1211
01:23:55,911 --> 01:24:02,000
पर जहाँ किसी गहरी पर्वत श्रृंखला सेहिमनद ऊपर की ओर मुड़ जाता है,

1212
01:24:02,084 --> 01:24:06,255
बर्फ़ भाप बन कर उड़ जाती है और उसकेअंदर छिपी चीज़ें सतह पर आ जाती हैं।

1213
01:24:08,090 --> 01:24:11,593
यहाँ पड़ा हर पत्थर एक उल्का-पिंड है।

1214
01:24:55,345 --> 01:24:58,473
दाईं ओर वाले आदमी को देखिए।उसे कुछ मिला है।

1215
01:25:12,154 --> 01:25:14,948
वह सौभाग्यशाली आदमी तो क्लाइव निकला।

1216
01:25:15,574 --> 01:25:18,619
आपको यह बनाया हुआ लग रहा होगा,पर सच में वही था।

1217
01:25:23,415 --> 01:25:29,296
यही है! यही है आपका नमूना!

1218
01:25:29,379 --> 01:25:31,548
बधाई हो।

1219
01:25:31,632 --> 01:25:34,218
यह बड़ा है। आज का सबसे बड़ा है।

1220
01:25:34,301 --> 01:25:38,013
मुझे एक वहाँ मिला। एक छोटा सा।

1221
01:25:38,096 --> 01:25:39,431
और फिर जब मैं...

1222
01:25:39,515 --> 01:25:41,141
वह उस पूरे सीज़न का भी

1223
01:25:41,225 --> 01:25:45,020
सबसे बड़ा उल्का-पिंड निकला,

1224
01:25:45,103 --> 01:25:50,442
और पहले आँकलन से तो लगाकि वह बहुत दुर्लभ नमूना था।

1225
01:26:03,872 --> 01:26:08,252
हमने अपनी तलाश दोबारा शुरू कीपर हमारे मन में एक विचार आया।

1226
01:26:09,086 --> 01:26:13,048
रात आने में अभी पूरे पाँच महीने बाकी हैं,

1227
01:26:13,799 --> 01:26:19,471
और हम अगले 5,000 किमी तक बिना किसीव्यक्ति को मिले चलते रह सकते हैं।

1228
01:26:42,786 --> 01:26:47,666
यह अंतरिक्ष में पैदल चलने वालों कापरम अनुभव होगा।

1229
01:26:49,168 --> 01:26:55,174
पर हम एक जगह जानते थे जहाँ हमारे कदम नहीं,हमारी आत्माएँ चलना शुरू करती हैं,

1230
01:26:55,924 --> 01:27:00,137
ऐसी जगह जहाँ हम अपनेमानव अस्तित्व से ऊपर उठ जाते हैं।

1231
01:27:05,267 --> 01:27:09,605
हमारी अंतिम यात्राहमें टोरेस जलसंधि के द्वीप समूह के

1232
01:27:09,688 --> 01:27:12,774
एक सबसे दूर-दराज़ के द्वीप में ले गई।

1233
01:27:13,859 --> 01:27:18,238
ये द्वीप ऑस्ट्रेलियाऔर न्यू गिनी के बीच में स्थित हैं।

1234
01:27:20,032 --> 01:27:25,412
मर नाम के इस छोटे से द्वीप कीजनसंख्या क़रीब 400 है।

1235
01:27:26,747 --> 01:27:30,959
हमने टूटते तारों के बारे मेंआदिवासियों के विश्वास के बारे में सुना था

1236
01:27:31,043 --> 01:27:35,506
कि टूटते तारे मृतकों की आत्माओं कोकहीं और नए जीवन में लेकर जाते हैं।

1237
01:27:38,175 --> 01:27:40,469
डग पासी, एक वृद्ध आदिवासी...

1238
01:27:40,552 --> 01:27:41,553
फ़ालेन 'डग' पासी

1239
01:27:41,637 --> 01:27:47,142
...उल्काओं पर आत्माओं केअधिलोक में जाने की कहानियाँ जानते थे।

1240
01:27:49,436 --> 01:27:55,400
मेरे एक परिवार के सदस्य कोभूतों ने "मैयर" पर भेजा था।

1241
01:27:55,484 --> 01:27:58,237
-"मैयर" एक उल्का है?-टूटता तारा, हाँ।

1242
01:27:58,320 --> 01:28:03,075
और वह सच में उस "मैयर" पर थीं,

1243
01:28:03,158 --> 01:28:04,284
आग से जल गईं थीं।

1244
01:28:06,912 --> 01:28:07,913
यही मैंने सुना था।

1245
01:28:08,872 --> 01:28:11,458
और उन्होंने कहा यह एक सच्ची कहानी है।

1246
01:28:12,167 --> 01:28:16,380
और वह महिला... बूढ़ी महिला...उनका नाम गिज़ू सिम्बोलो था।

1247
01:28:16,463 --> 01:28:18,090
वह जीवित थीं या उनकी आत्मा थी?

1248
01:28:18,173 --> 01:28:19,925
वह जीवित थीं, हाँ।

1249
01:28:20,551 --> 01:28:23,345
और जब परिवार का कोई सदस्यमरने वाला होता है...

1250
01:28:24,721 --> 01:28:27,307
"मैयर" हमें कहानी सुना सकता है,जिसमें वह कहेगा,

1251
01:28:27,391 --> 01:28:31,645
"कुछ दिनों में कोई खो जाएगा।" या...

1252
01:28:32,396 --> 01:28:34,022
या...या...

1253
01:28:34,857 --> 01:28:38,026
"देखो वह कहीं और जा रहा है।"

1254
01:28:39,444 --> 01:28:44,199
तारा... टूटता तारा। "मैयर।"कभी लाल। कभी हल्का नीला।

1255
01:28:46,159 --> 01:28:47,995
ऐसा लगता है जैसे यहाँ मृत्यु...

1256
01:28:48,078 --> 01:28:51,957
यह कोई एक घटना नहीं है।यह किसी यात्रा की शुरुआत है।

1257
01:28:53,208 --> 01:28:57,129
एक नए जीवन की नई यात्रा की शुरुआत। हाँ।

1258
01:29:02,342 --> 01:29:04,052
वे अलग-अलग रूपों में आ सकते हैं।

1259
01:29:04,761 --> 01:29:09,099
पक्षी के रूप में। कुत्ते के रूप में।किसी मनुष्य के रूप में।

1260
01:29:11,143 --> 01:29:14,313
या किसी परछाईं के रूप मेंजो आपको दीवार पर चलते हुए दिखती है।

1261
01:29:14,980 --> 01:29:16,857
या तैरती हुए लकड़ी के रूप में।

1262
01:29:17,941 --> 01:29:20,360
समुद्र पर तैरती हुई लकड़ी।

1263
01:29:27,826 --> 01:29:29,995
क्योंकि हम कैमरा लेकर गए थे,

1264
01:29:30,078 --> 01:29:33,749
द्वीप वासियों ने एक बहुत पुरानाभूला हुआ डांस जो आधी सदी से

1265
01:29:33,832 --> 01:29:36,877
यहाँ नहीं किया गया था, हमें करके दिखाया।

1266
01:29:44,092 --> 01:29:49,556
अलो टापिम, एक वृद्ध नेयुवाओं को कोरियोग्राफ़ी के निर्देश दिए।

1267
01:29:59,566 --> 01:30:03,612
अलो टापिम

1268
01:30:48,240 --> 01:30:54,288
यह डांस "मैयर" के बारे में हैजैसा आपने बताया है।

1269
01:30:55,747 --> 01:30:59,918
"मैयर" वह तारा है, वह धूमकेतू।

1270
01:31:00,794 --> 01:31:02,713
और वह एक विशेष तारा है।

1271
01:31:06,967 --> 01:31:11,221
यह तारा मरियम लोगों कोकेवल विशेष अवसरों पर ही नज़र आता है।

1272
01:31:11,305 --> 01:31:14,099
मरियम इस तारे को देखते हैं

1273
01:31:14,766 --> 01:31:18,937
जब कोई अपना इस जीवन को त्याग करअगले जीवन में जाता है।

1274
01:31:20,647 --> 01:31:23,734
यह परिवर्तन इस तारे के द्वारा होता है।

1275
01:31:26,195 --> 01:31:31,408
नृतकों ने नेअर उठाए हुए हैं। मशालें।

1276
01:31:32,618 --> 01:31:34,578
हम उसे नेअर कहते हैं।

1277
01:31:35,412 --> 01:31:36,538
वे उनको उठाए रहते हैं।

1278
01:31:38,248 --> 01:31:43,420
और वह इशारा करते हैं कब वह तारा...

1279
01:31:43,504 --> 01:31:48,425
टूटता तारा अंगारे गिराता है।

1280
01:31:50,010 --> 01:31:52,721
इसका संकेत उनकी उठाई मशालों से मिलता है।

1281
01:31:54,181 --> 01:31:57,142
और जब दो मशालें, ताली बजाती...

1282
01:31:58,769 --> 01:32:00,771
वे आपस में टकराती हैं,

1283
01:32:01,605 --> 01:32:04,942
ताली बजाती हैं, दो मशालें, तो अंगारे...

1284
01:32:06,902 --> 01:32:08,987
और यह देखा जाता है।

1285
01:32:12,824 --> 01:32:17,621
यह बताता... तारे के बारे में बताता है।

1286
01:32:19,831 --> 01:32:21,750
हाँ। और यह हमारी कहानी है।

1287
01:37:36,857 --> 01:37:38,859
उप-शीर्षक अनुवादक: मृणाल अग्रवाल



